तमाशबीन पूछते रहते निरर्थक सवाल
क्या लगता है कि बाज़ार किधर जाएगा? मोदी सरकार दोबारा सत्ता में आएगी या कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए सरकार बनेगी? दोनों ही सूरत में शेयर बाज़ार का क्या हाल रहेगा? बाज़ार चुनावों के बाद गिरेगा कि बढ़ेगा? गिरा तो कितना और बढ़ा तो कितना? इस साल भारत का डीजीपी कितना रह सकता है? ऐसे सवालों से आप भी रू-ब-रू होते होंगे। लेकिन ये तमाशबीनों के सवाल है, बाज़ार से कमानेवालों के नहीं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
बाजार देता दौलत बनाने का मौका
सरकारें आती रहीं, जाती रहीं। हमारी अर्थव्यवस्था जिस रफ्तार से बढ़ी, उससे ज्यादा रफ्तार से शेयर बाज़ार बढ़ा। बीते 39 सालों में बीएसई सेंसेक्स 305 गुना से ज्यादा बढ़ा है। इसने उन सभी लोगों को दौलत बनाने का मौका दिया, जिन्होंने समझदारी से अच्छी कंपनियों में लंबे समय के लिए निवेश किया। हमें भी यही रास्ता अपनाना चाहिए और चुनावी तमाशे व टीवी चैनलों पर मचे शोर से दूर रहना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
बाजार का रिटर्न है सरकार से स्वतंत्र
बीएसई सेंसेक्स 1 जनवरी 1980 से 31 दिसंबर 2018 के बीच 118 से 36,068 पर पहुंच गया। 39 सालों में 306 गुना। 15.8% सालाना चक्रवृद्धि दर। अर्थव्यवस्था से ज्यादा बढ़ा। पर अलग-अलग साल को देखें तो उसने गठबंधन सरकार में सबसे ज्यादा और सबसे कम रिटर्न दोनों दिए हैं। एकदलीय सरकार में भी यही हाल रहा। साफ है कि सरकार के स्वरूप और शेयर बाज़ार के रिटर्न में कोई सीधा रिश्ता नहीं है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी







