ये चुनावी साल बन सकता है अपवाद
अब तक पिछले बीस सालों में जिन चुनावी सालों में सेंसेक्स जमकर बढ़ा है, उस दौरान वह चार मौकों पर अपने दीर्घकालिक औसत से कम पी/ई पर ट्रेड हो रहा था। लेकिन इस साल वह औसत पी/ई से ज्यादा स्तर पर ट्रेड हो रहा है। इसलिए अधिक आशंका इस बात की है कि इस साल चुनावों के बाद चाहे मोदी सरकार दोबारा सत्ता में आए या दूसरी सरकार बने, बाजार गिर सकता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
चुनावी साल में जमकर बढ़ता बाज़ार!
जबरदस्त चुनावी सरगरमियां। चुनाव का साल। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पिछले बीस सालों में बीएसई सेंसेक्स में 50% से ज्यादा बढ़त उन सालों में हुई है जिनमें लोकसभा के चुनाव हुए थे। दिसंबर 1998 से अप्रैल 2019 तक सेंसेक्स 36,000 अंक बढ़ा है। इसमें से करीब 20,000 अंकों की वृद्धि साल 1999, 2004, 2009 और 2019 में अप्रैल अंत तक हुई है। ये सभी चुनावों के साल रहे हैं। क्या होगा आगे? अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
तीन चरण बाकी, नतीजों का इंतज़ार
चार चरणों का मतदान हो चुका। तीन चरणों का बाकी। अंतिम सातवां चरण 19 मई को संपन्न होगा। सुप्रीम कोर्ट ने 21 विपक्षी दलों की याचिका पर आधे ईवीएम में पड़े वोटों को वीवीपैट की पर्चियों से मिलाने का फैसला न सुनाया तो 23 मई को स्पष्ट हो जाएगा कि अगले पांच सालों के लिए केंद्र में किसकी सरकार बनेगी। जाहिर है कि शेयर बाज़ार दिल थामकर नतीजों का इंतज़ार कर रहा है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी







