मजबूरी में रोना न पड़े खून के आंसू!
आज स्थिति यह है कि सेंसेक्स और निफ्टी में शामिल बहुतेरी कंपनियों के फंडामेंटल कमजोर या ठहरे पड़े हैं। पर तेज़ड़िए उन्हें चढाए पड़े हैं। गुब्बारा फूलता जा रहा है। यह यकीनन किसी दिन फूटेगा। लेकिन जब फूटेगा तब जो असावधान हैं, उन्हें खून के आंसू रोने पड़ेंगे। मजबूरन साल 2008 को याद करना पड़ेगा, जब दिग्गजों तक को धूल चाटनी पड़ी थी। उसके बाद बाज़ार तब उठेगा जब कंपनियों के फंडामेंटल सुधरेंगे। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
उन्माद में ट्रेडरों को कुछ सूझता नहीं
बाज़ार में अजीव-सा उन्माद/सन्निपात छाया है। इस वास्तविकता को कोई तवज्जो नहीं दे रहा कि शेयर बाज़ार हमेशा चक्रों में चलता है। तेज़ी के बाद मंदी का दौर आता ही है। न मंदी अनंत समय तक चलती है और न ही तेज़ी। उसी तरह जैसे सर्दियों के बाद गरमियां अनिवार्यतः आती हैं। मंदी बाज़ार के मूल्यांकन को वाजिब व तर्कसंगत स्तर पर ले आती है। लेकिन तेजी से उत्साहित ट्रेडर समझते ही नहीं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
धन का प्रवाह कितना चढ़ाएगा बाज़ार
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का धन बराबर आ रहा है। अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने का मुद्दा नेपथ्य में जा चुका है। एलआईसी जैसी देशी संस्थाओं का धन भी आ रहा है। कंपनियों के नतीजे भले कमज़ोर निकल रहे हों, लेकिन धन का अटूट प्रवाह चुनिंदा शेयरों को उछाले जा रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी थोड़ा दबने के बाद फिर उठ जाते हैं। ट्रेडरों को यकीन है कि बाज़ार अनंत समय तक बढ़ता रहेगा। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
बाज़ार जा पहुंचा है खतरनाक ज़ोन में
भारतीय शेयर बाज़ार खतरनाक ज़ोन में पहुंच गया है। 16 अप्रैल 2019 को निफ्टी अब तक के सबसे ज्यादा पी/ई 29.42 पर ट्रेड हुआ। शुक्रवार, 3 मई को उसका पी/ई अनुपात 29.34 रहा है। बता दें कि 9 जनवरी 2008 को जब बाज़ार ऐतिहासिक ऊंचाई से फिसला था, तब भी निफ्टी का पी/ई अनुपात 28.22 ही था। अगले नौ महीने में 27 अक्टूबर 2008 तक वह टूटकर 10.68 के पी/ई तक गिर गया। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
ब्रांड बन निखर जाते हैं माल व नेता
चुनावों ही नहीं, शेयर बाज़ार तक में छवि का बड़ा महत्व है। नहीं तो दो रुपए का पानी बिसलेरी बनकर बीस रुपए में नहीं बिकता। सामान्य माल जब ब्रांडेड उत्पाद बनता है तो उसके विज्ञापन पर होनेवाले खर्च से कहीं ज्यादा मुनाफा कंपनी को मिलने लगता है। कोकाकोला या पेप्सी इसके नायाब उदाहरण हैं। निवेश लायक कंपनियां चुनते वक्त हमें उनके ब्रांडों की ताकत का भी ध्यान रखना चाहिए। आज तथास्तु में ऐसे ही दमखम वाली कंपनी…औरऔर भी






