शेयर बाज़ार का मौजूदा माहौल लालच और डर से फांस-दर-फांस भरा पड़ा है। अक्सर लगता है कि दांव लगा लो तो डूबने की कोई गुंजाइश नहीं। लेकिन अगले ही दिन शेयर 10% से ज्यादा डूब जाता है और कई दिनों तक डूबता ही रहता है। ऐसे में सीधा-सरल नियम है अनुशासन व रणनीति पर डटे रहना। आपने न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न के लिए जो नियम बना रखे हैं, उन पर अडिग रहना। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

इस समय बाज़ार में जो स्थिति है, वह बड़ी भ्रामक है। बमुश्किल 50-100 शेयर हैं जो कुलांचे मारे जा रहे हैं। वहीं, बाकी डेढ़ हज़ार से ज्यादा शेयर रसातल का रुख किए हुए हैं। ऐसे शेयर जब कभी थोड़ा-बहुत बढ़ते भी हैं तो फौरन मुनाफावसूली से दबा दिए जाते हैं। बाज़ार की हालत देखकर समझदार लोगों का कहना है कि इस वक्त रिस्क लेने के बजाय कैश संभालकर रखना सबसे सुरक्षित पोजिशन है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार में बढ़ने और गिरने के असंतुलित व विपरीत स्वभाव को देखते हुए संकट का पहला संकेत मिलते ही जितना मिल रहा हो, उतने पर बेचकर निकल लेना चाहिए। संस्कृत में एक कहावत है कि सर्वनाशे समुत्पन्ने अर्धं त्यजति पंडितः अर्थात सम्पूर्ण का नाश होते देखकर आधे को बचा लें और आधे का त्याग कर दें। हमेशा यह सच स्वीकार करके चलें कि निवेश व ट्रेडिंग निश्चितताओं का नहीं, प्रायिकताओं का खेल है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में मंदी के दौर का स्वभाव तेज़ी के दौर से एकदम उलटा होता है। मंदी में बाज़ार धीरे-धीरे नहीं, एकबारगी गिरता है। अक्सर होता यह है कि एक-दो साल में बाजार या कोई स्टॉक जितना बढ़ा होता है, वह सारी की सारी बढ़त चंद दिनों में स्वाहा हो जाती है। बहुत सारे स्टॉक्स धारदार चाकू की तरह गिरते हैं, जिन्हें पकड़ने की कोशिश में घाव और गहरे होते चले जाते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी