भारत का पता नहीं, लेकिन दुनिया के आधे निवेशक चिंतित हैं कि मंदी आने ही वाली है और शेयर बाज़ार कभी भी क्रैश हो सकते हैं। विश्व की जानी-मानी बीमा कंपनी एलियांज़ लाइफ के ताज़ा सर्वेक्षण से यह बात सामने आई है। चालू साल की पहली तिमाही में निराशा से घिरे ऐसे निवेशक 46% और दूसरी तिमाही में 48% थे, जो तीसरी तिमाही में 50% हो गए। तथास्तु में आज ऐसी कंपनी जिसे मंदी मार नहीं सकती…औरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था के सुस्त पड़ने और आगे इसकी हालत बिगड़ते जाने की आशंका कतई निराधार नहीं है। मगर भारत की सुदीर्घ विकासगाथा का अंत अभी नहीं हुआ है और न ही अगले 10-15 सालों में होगा। हमारे यहां इतनी तगड़ी उद्यमशीलता है कि उसे अगर माकूल सरकारी नीतियों का साथ मिल जाए तो भारत 10 साल में चीन के समकक्ष और 15 साल में उससे भी आगे निकल सकता है। यह होकर रहेगा। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

अपने यहां कंपनियों के प्रवर्तक भी शेयर बाज़ार के अहम खिलाड़ी हैं। आखिर कंपनी के वर्तमान व भविष्य के बारे में उनसे बेहतर कौन जान सकता है। इधर जब भी बाज़ार में अफरातफरी मची है, तब यस बैंक जैसे अपवादों को छोड़ दें तो प्रवर्तकों ने घबराकर अपने शेयर नहीं बेचे हैं। इसके विपरीत तमाम प्रवर्तकों ने बाज़ार से शेयर खरीदकर कंपनियों में अपनी इक्विटी हिस्सेदारी बढ़ाई है। यह काफी शुभ लक्षण है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

विदेशी निवेशक ही नहीं, देश के स्मार्ट निवेशकों ने भी शेयर बाज़ार में अब निचले स्तर पर खरीद शुरू कर दी है। वे ऐसे समझदार निवेशक हैं जो बाज़ार, अर्थव्यवस्था और कंपनियों की गहरी समझ रखते हैं। राकेश झुनझुनवाला जैसों की तरह शोर नहीं मचाते, न ही प्रवर्तकों से डील करते हैं, बल्कि चुपचाप स्तरीय कंपनियों में करोड़ों का निवेश करते रहते हैं। अक्सर वे ऐसा प्राइवेट इक्विटी फर्मों के जरिए करते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी