एलआईसी सरकार का एटीएम तो नहीं
दिक्कत यह है कि आम भारतीय जिस एलआईसी को गाढ़े-वक्त का साथी मानते हैं, उसे हमारी सरकार ने अपना एटीएम बना रखा है। जहां कहीं निवेश करना हो, वह एलआईसी की गाढ़ी निधि का सहारा लेने लगी है। यहां तक कि सरकारी कपंनियों के शेयर बेचने या विनिवेश के कार्यक्रम में कोई नहीं मिला तो सारी बिक्री एलआईसी के मत्थे मढ़ दी जाती है और एलआईसी को मजबूरन उनका दाम चुकाना पड़ता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
विश्वास ऐसा कि टूट पाना है असंभव
एलआईसी के प्रति आम भारतीय निवेशकों में अविश्वास पैदा करना लगभग असंभव है। बैंकों व पोस्ट ऑफिस की सुरक्षित जमा के बाद लोगों के जेहन में एलआईसी का ही नंबर आता है। आम भारतीय पीढ़ियों से एलआईसी की पॉलिसी को सोने या फिक्स डिपॉजिट रसीद की तरह लॉकर में सुरक्षित रखते आए हैं। यह अलग बात है कि वे इसे निवेश मानते हैं, जबकि असल में वह जोखिम का बीमा कवच मात्र है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
बिजनेस मॉडल अभी तो लगे सुरक्षित
पिछले हफ्ते कांग्रेस ने एक प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया कि सरकार एलआईसी के धन का दुरुपयोग कर रही है और किसी दिन हालत ऐसी हो सकती है कि एलआईसी को बंद करना पड़ जाए। लेकिन यह आशंका काफी अतिरंजित लगती है। फिलहाल एलआईसी का बिजनेस मॉडल सुरक्षित नज़र आता है। वह अपने कुल निवेश का लगभग 65% हिस्सा केंद्र व राज्य सरकार के सुरक्षित व अधिक ब्याज वाले बॉन्डों में लगाती है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
एलआईसी है भरपूर सरकारी बॉन्डों में
चालू वित्त वर्ष 2019-20 में एलआईसी को 3.49 लाख करोड़ रुपए का निवेश करना है। यह रकम वह सरकारी प्रतिभूतियों, कॉरपोरेट बांडों व शेयरों समेत पूंजी बाज़ार के सभी प्रपत्रों में लगाएगा। इसमें से कितना धन कहां लगाया जाएगा, इसका पता नहीं। लेकिन बीते वित्त वर्ष 2018-19 में उसने 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा केंद्र व राज्य सरकारों के बॉन्डों में लगाए थे और उन पर लगभग 8.25% का रिटर्न कमाया था। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
शेयर बाज़ार का सारा खेल प्रायोजित!
शेयर बाज़ार में सारा प्रायोजित खेल चल रहा है। चौंकाने वाला तथ्य है कि शुक्रवार को वित्त मंत्री की घोषणा के बाद जब सेंसेक्स व निफ्टी 5.32% उछल गए, तब बाज़ार के सबसे उस्ताद खिलाड़ी विदेशी निवेशक संस्थाओं ने मात्र 35.78 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीद की। वहीं, देशी संस्थागत निवेशकों ने 3001.32 करोड़ रुपए की भारी शुद्ध खरीद की। इन देशी संस्थाओं में एलआईसी को ही सबसे बड़ा मोहरा बनाया जाता है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी





