बाज़ार में इंट्रा-डे ट्रेडरों का बोलबाला
दिशाहीन बाज़ार में फिलहाल इंट्रा-डे ट्रेडर ही चल रहे हैं। इनमें भी खासतौर पर माइक्रो-ट्रेन्ड ट्रेडर जो ऐसे ट्रेडर हैं जो 59 मिनट 59 सेकेंड से ज्यादा ट्रेड नहीं करते। सौदे एक घंटे के भीतर काट देते हैं। वहीं, इंट्रा-डे ट्रेडर दिन के दिन में सौदे काटते हैं। उनके सौदों का सारा हिसाब-किताब दिन की ट्रेडिंग खत्म होने के साथ ही बराबर हो जाता है। न ऊधव का लेना, न माधव का देना। अब शुक्रवार का अभ्यास…और भीऔर भी
एफआईआई का रुख अभी साफ नहीं
हमारे शेयर बाज़ार की दशा-दिशा के सबसे बड़े निर्धारक हैं विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई)। एफआईआई भी इन्हें कहा जाता है। बजट के बाद इन्होंने अभी तक रुख साफ नहीं किया है। जब तक इनका रुख स्पष्ट नहीं होता, तब तक बाज़ार यूं ही दिशाहीन रहेगा। ये संस्थाएं निवेश की निश्चित रकम हर तिमाही के लिए आवंटित कर देती हैं। फिर उसके मुताबिक अनुशासन में बंधकर बाज़ार में धन डालती या उससे निकालती हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
बाज़ार अभी तक नहीं हो पाया स्थिर
बाज़ार धीरे-धीरे स्थिर हो रहा है। लेकिन अब भी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। शॉर्ट करनेवाले अपनी पोजिशन कवर कर रहे हैं तो वह थोड़ा-थोड़ा करके बढ़ रहा है। इस मायने में कहां जाए तो शॉर्ट से कमानेवाले या मंदडिए शेयर बाज़ार को एक हद तक गिरने पर उठाने लगते हैं। वैसे, अभी तक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने साफ नजरिया नहीं बनाया है। वे किसी दिन खरीदते तो किसी दिन बेचते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…और भीऔर भी
धन का प्रवाह चढ़ा देता है शेयरों को
जहां हर पल लाखों लोगों की भावनाओं का ज्वार चलता हो, वहां तर्क का बह जाना निश्चित है। इसीलिए शेयर बाज़ार में बड़ी-बड़ी गणनाएं अक्सर फेल हो जाया करती हैं। फिर भी एक मोटा-सा नियम हमेशा काम करता है। अगर किसी भी वजह से ज्यादा धन किसी स्टॉक का पीछा करेगा तो लिवाली से उसका बढ़ना तय है। उसके बाद उसमें बिकवाली भी चलेगी। कुशल ट्रेडर लिवाली व बिकवाली के बीच कमाते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…और भीऔर भी






