आधिकारिक व अंतिम आंकड़ों के मुताबिक इस साल मार्च में कोरोना से घबराकर विदेशी पोर्टफोलियो या संस्थागत निवेशकों (एफपीआई/ एफआईआई) ने हमारे शेयर बाज़ार से शुद्ध रूप से 61,972.75 करोड़ रुपए निकाले थे। वहीं, नवंबर महीने में उन्होंने शुद्ध रूप से इसमें 60,357.67 करोड़ रुपए डाले हैं। पूरे कैलेंडर वर्ष 2020 में जनवरी से नवंबर तक के 11 महीनों में उन्होंने भारतीय शेयर बाज़ार में शुद्ध रूप से 1,08,244.71 करोड़ रुपए लगाए हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

मोदी सरकार गरीबों, किसानों व आमलोगों का भला करने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में वह अमीरों व कॉरपोरेट्स का ही भला कर रही है। मसलन, वितरित लाभांश पर पहले कंपनियों को सेस-सरचार्ज मिलाकर 20.56% टैक्स देना पड़ता था। लेकिन इस साल से उन्हें नहीं, बल्कि शेयरधारकों को लाभांश पर टैक्स देना पड़ेगा। सरकार ने कंपनियों के भले के लिए आम निवेशकों को दबाया, खुद भी घाटा उठाया। आज तथास्तु में जमकर लाभांश देनेवाली एक कंपनी…औरऔर भी

टेक्निकल एनालिसिस पर बहुत सारी जानकारी आपको इंटरनेट पर मिल जाएगी। उनका अभ्यास आप बीएसई या एनएसई की साइट पर मुफ्त में उपलब्ध चार्टिंग सुविधा से कर सकते हैं। वहां आप हरेक इंडीकेटर आजमाकर देख सकते हैं। आरएसआई केवल भावों के दैनिक चार्ट का मायने रखता है; 30 के आसपास तो खरीद और 70 से ऊपर तो बिकवाली की आशंका। लेकिन भाव तय करने का असली कारक है बैंकों व संस्थाओं का रवैया। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

कैंडल का आकार ही नहीं, चार्ट पर उनकी पोजिशन भी अहमियत रखती है। हैमर सबसे नीचे और रिवर्स हैमर सबसे ऊपर होने पर सबसे ज्यादा प्रभावशाली होता है। बीच में इधर-उधर कहीं हों तो उनका खास मायने-मतलब नहीं होता। कैंडल के अलावा टेक्निकल एनालिसिस में हम ज्यादा नहीं, बस दो-तीन इंडीकेटर की समझ बनाकर अभ्यास कर लें तो काम भर की स्पष्टता आ जाती है। इसमें आरएसआई और मूविंग औसत सबसे अहम हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी