ऑक्सफैम की रिपोर्ट बताती है कि कोरोना प्रकोप के बीच मार्च 2020 में लॉकडाउन लगने के बाद देश के शीर्ष 100 अरबपतियों की आय 12,97,822 लाख करोड़ रुपए बढ़ गई। जब उद्योग व सेवा क्षेत्र की सारी गतिविधियां ठप थीं, तब आखिर इतना धन उनके पास आया कहां से, जिससे 13.8 करोड़ निर्धनतम भारतीयों को 94,045 रुपए का चेक मुफ्त में दिया जा सकता है? इस दौरान एफएमसीजी, दवा और ऑनलाइन रिटेल के अलावा केवल शेयर बाज़ार ही चल रहा था! कितना कमाया होगा बाज़ार से? अब बुधवार की बुद्धि…और भी

अगले सोमवार को बजट का दिन है। फिलहाल बाज़ार में कयास जारी हैं कि उसमें क्या-क्या हो सकता है। भांति-भांति की उम्मीदें तैर रही हैं। मसलन यह कि इस बार ऑटोमोबाइल उद्योग को खास राहत दी जा सकती है। इससे दोपहिया से लेकर कार व कमर्शियल वाहन बनानेवाली कंपनियों को फायदा होगा तो इनके शेयरों में जमकर खरीद हो रही है। नतीजतन, बीते हफ्ते 18 से 22 जनवरी के बीच निफ्टी ऑटो सूचकांक 5.57% बढ़ चुका है। बाज़ार इसी तरह बजट उम्मीदों की झांकी दिखाता है। अब सोमवार का व्योम…और भी

कस्टमाइजेशन का ज़माना है। उत्पाद व सेवाओं को ग्राहक की खास बुनावट व ज़रूरतों के हिसाब से ढाला जाता है। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग व निवेश में भी बिना हायतौबा मचाए कमाना है तो हमें अपने माफिक स्टॉक्स व कंपनियां चुननी होंगी। निवेश का पक्का फॉर्मूला है कि जिस कंपनी का धंधा, उसका बिजनेस मॉडल हमें अच्छी तरह समझ में आ रहा हो, उसी में धन लगाना चाहिए। किसी की नकल नहीं करनी चाहिए क्योंकि नकल मेंऔरऔर भी

सरकार के पास टैक्स का इतना टोंटा है कि बजट में उपहारों की बरसात नहीं कर सकतीं। उससे कर-मुक्त आय की सीमा बढ़ाने या टैक्स-रियायतों की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसके विपरीत सरकार कोरोना वैक्सीन का खर्चा निकालने के लिए किसी तरह का सेस ज़रूर लगा सकती है। असल में वह बुरी तरह घिर गई है। धन है नहीं, लेकिन धनवान दिखाना उसके लिए ज़रूरी है। इसलिए हवा-हवाई का अंदेशा ज्यादा है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी