शेयरों का स्वभाव तो सूचकांकों का चक्र अलग
शेयर बाजार चक्रों में चलता है। इसको ध्यान में रखते हुए ही टेक्निकल एनालिसिस में मूविंग औसत के दिन तय किए जाते हैं। मकसद होता है कि चक्रों के उतार-चढ़ाव को सही तरीके से पकड़ा जाए। गलत हिसाब लगाया तो धोखा। मसलन, एक्पोनेंशियल मूविंग औसत 5, 13 व 20 दिन का लेना चाहिए, जबकि सिम्पल मूविंग औसत 50, 75, 100, 200, 300 व 365 दिनों का कारगर होता है। फिर यह भी ध्यान रखें कि बाज़ार मेंऔरऔर भी
महीने से सप्ताह, सप्ताह से दिन, दिन से घंटे
दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में महीने में ज्यादा से ज्यादा 20 दिन ट्रेडिंग होती है। शनिवार-रविवार बंद। इसलिए बाज़ार का स्वाभविक चक्र 20 दिन का होता है। महीने के डेरिवेटिव सौदों की मीयाद इन्हीं 20 दिनों की होती है। सारे ट्रेडरों का खरीदना-बेचना इसी हिसाब से चलता है तो 20 दिन का चक्र बन जाता है। इधर अपने यहां ऑप्शन सौदे सप्ताह में सेटल होने लगे हैं तो महीने के भीतर सप्ताह का भी अलग चक्रऔरऔर भी
बड़े चक्र में छोटा चक्र, छोटे में और भी छोटा!
रिटेल ट्रेडर चाहे नौकरीपेशा हो या काम-धंधा करता हो, उसके पास महीने के शुरू में धन की गरमी रहती है तो ज्यादा रिस्क ले सकता है। लेकिन महीने का अंत आते-आते सारी गरमी निकल जाती है तो उसकी सक्रियता कम हो जाती है। दरअसल, बाज़ार में सक्रिय इंसानों व संस्थाओं का बर्ताव ही उसमें चक्र का स्वभाव पैदा करता है। वरना, शेयर बाज़ार को कोई सजीव वस्तु तो है नहीं, जिसमें अपने-आप चक्र का चक्कर चल निकले।औरऔर भी
पकड़ा बाज़ार का चक्र तो समझा सारा चक्कर
त्योहारी सीज़न के साथ हमारे वित्त वर्ष की दूसरी छमाही का आगाज़ होता है। इस दौरान आर्थिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं तो इसका सीधा असर शेयर बाज़ार पर पड़ता है। लेकिन इस सीज़न को परे रखकर देखें तो भी शेयर बाज़ार कुदरत की ऋतुओं की तरह चक्रों में चलता है। आप कहेंगे कि बाज़ार तो छोटे-बड़े हरेक ट्रेडर की खरीद-बिक्री का योगफल होता है। फिर इसमें कहां से मौसम जैसा चक्र आ गया? दरअसल बाजार का हालऔरऔर भी
समझदार निवेशकों के लिए अवसर हैं हमेशा
दिलों में सिहरन-सी है, दिमाग में भय-सा है कि शेयर बाज़ार कभी भी क्रैश हो सकता है। चीन का आर्थिक संकट और अमेरिका में लटके पड़े प्रमुख सरकारी बिल इन आशंकाओं के ठोस आधार हैं। ऊपर से बढ़ती मुद्रास्फीति और उसके असर को सम करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार। बावजूद इसके बाज़ार थोड़ा-बहुत दम मारकर फिर चढ़ जाता है। चीन से उपजी चिंता ज्यादा ठोस है क्योंकि रीयल एस्टेट फर्म एवरग्रांड के अलावा वहांऔरऔर भी






