सबका देशहित सर्वोपरि, इनका व्यक्ति!
अमेरिका से लेकर ब्रिटेन और जर्मनी तक, दुनिया के तमाम देश अपने हितों को सबसे ऊपर रखकर भारत से व्यापार वार्ता और संधि कर रहे हैं। चीन तक अपने उद्योगों के हित में भारत का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन भारत का हित आज हाशिए पर पड़ा है क्योंकि यहां करीब 12 सालों से ऐसी सरकार चल रही है जिसके लिए भारत का हित मतलब अडाणी जैसे उन चंद यारों का हित हो गया है जो उसेऔरऔर भी
व्यक्ति झाड़ पर, भारत को बनाया बौना
देश किसी भी व्यक्ति से बहुत-बहुत ऊपर होता है, चाहे वो देश का प्रधानमंत्री ही क्यों न हो। हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इसके अपवाद नहीं हो सकते। लेकिन भाजपा सरकार और संघ परिवार के संगठन मोदी की घरेलू व विदेश नीति की निष्पक्ष समीक्षा करने के बजाय नितांत फर्जी तरीकों से उन्हें भारत देश से भी बड़ा बनाने के अभियान में लगे हैं। इसके लिए इतिहास तक को गलत तरीके से पेश किया जा रहाऔरऔर भी
विश्वगुरु बोलते-बोलते दुनिया का जोकर
दुनिया के रंगमंच पर भारत की इस समय विचित्र स्थिति है। विदेशी निवेशक भारतीय अर्थव्यवस्था के बेदम हाल को देखकर किनारा कस रहे हैं। विदेश में कार्यरत भारतीयों को जगह-जगह उलाहना का पात्र बनना पड़ रहा है। जब पता चलता है कि जर्मनी में काम कर रहे भारतीय लोग वही काम कर रहे जर्मनों से 20% ज्यादा कमा रहे हैं, साथ ही भारत में क्रिसमस के मौके पर ईसाइयों पर हमले होते हैं तो यूरोप के कईऔरऔर भी
क्या आम क्या खास, धंधा है सबका मंदा!
बीएसई सेंसेक्स इस समय 23.06 और एनएसई निफ्टी सूचकांक 22.36 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। यह दुनिया में केवल अमेरिका के शेयर बाज़ार से सस्ता है, जबकि चीन, जापान, कोरिया, हांगकांग, ब्राज़ील, जर्मनी, फ्रांस, कनाडा व ऑस्ट्रेलिया तक से महंगा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक शायद इसी वजह से भारत से भागे जा रहे हैं। लेकिन इसके मूल में छिपी एक अन्य वजह है भारतीय अर्थव्यवस्था में खपत या उपभोग की दयनीय स्थिति। इसके दोऔरऔर भी






