विदेशी पोर्टफोलियो/संस्थागत निवेशकों (एफपीआई/एफआईआई) का खेल एकदम सीधा-सरल है। वे अपने देश से नगण्य ब्याज पर धन उठाकर भारतीय बाज़ार में लगाते हैं। इस पर उन्हें 5-6% रिटर्न भी मिल जाए तो ब्याज और जोखिम की भरपाई करने के बाद इतना सुरक्षित मुनाफा कमा लेते हैं जो उन्हें विकसित देशों में कभी नहीं मिल सकता। लेकिन अपनी अंतहीन लालच में उन्होंने भारतीय शेयर बाज़ार को भारतीयों की ही पहुंच से बाहर पहुंचा दिया। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

मौजूदा ग्लोबल-दौर में आम भारतीयों के बीच विदेशी वस्तुओं का क्रेज़ खत्म हो गया क्योंकि उनको दुनिया की लेटेस्ट चीजें देश में ही मिल जाती हैं। लेकिन हमारी सरकार में विदेशी पूंजी का भयंकर क्रेज़ है। रिकॉर्ड विदेशी निवेश का ढिंढोरा बराबर पीटती है। पोर्टफोलियो निवेशकों के गंजेड़ी स्वभाव (गंजेड़ी यार किसके, दम लगाके खिसके) पर सवाल उठे तो नियम बना दिया कि कंपनी में 10% से कम तो एफपीआई, ज्यादा तो एफडीआई। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

प्रत्यक्ष विदेशी निवेशक भारत के उद्योग-धंधों या व्यापार मे निवेश करते हैं। इस तरह देश में रोज़गार के थोड़े-बहुत अवसर पैदा करते हैं। उनकी कमाई का थोड़ा हिस्सा भारतीयों को भी मिलता है। लेकिन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई/एफआईआई) का मकसद बाहर से डॉलर, यूरो या येन जैसी विदेशी मुद्रा लाकर भारत के ऋण या शेयर बाज़ार से विशुद्ध कमाई करना होता है। उनके भारतीय ऑफिस में मुठ्ठीभर कर्मचारी होते हैं, जबकि कमाई जबरदस्त। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने चालू वित्त वर्ष 2020-21 में देश का जीडीपी कितना रह सकता है, इसका पहला अग्रिम अनुमान पेश कर दिया है। उसका कहना है कि मौजूदा मूल्य पर हमारी अर्थव्यवस्था का आकार पिछले साल के 203.40 लाख करोड़ रुपए से घटकर इस बार 194.82 करोड़ रुपए रह सकता है, जबकि बजट अनुमान 224.89 लाख करोड़ रुपए का था। यानी, पिछले साल से 8.58 लाख करोड़ रुपए और इस साल के बजट अनुमान सेऔरऔर भी

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाज़ार में साल 2020 में शुद्ध रूप से 1,70,260.39 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड निवेश किया। साल 2019 में उन्होंने 1,01,120.77 करोड़ रुपए, 2017 में 51,252.92 करोड़ रुपए, 2016 में 20,566.18 करोड़ रुपए, 2015 में 17,805.96 करोड़ रुपए और 2014 में 97,055.55 करोड़ रुपए डाले थे। वहीं, साल 2018 में यहां से 33,013.05 करोड़ रुपए निकाले थे। छह साल में 4,25,048.72 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश। आखिर क्यों? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी