साल ने भरी किसकी जेब, किसकी जेब खाली!
क्या रहे हैं साल 2021 के खास सबक? जिन्होंने भी शेयर बाज़ार से ट्रेडिंग को अपना प्रोफेशल बनाया है और इसी से अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं, उन्हें ये सबक निजी स्तर पर निकालने होंगे। उन पर मनन करना होगा ताकि नकारात्मक बातों को पीछे छोड़ सकारात्मक बातों के साथ आगे बढ़ा जा सके। मोटेतौर उन्हें समझना होगा कि मन के भंवरजाल से मुक्त होकर वे शेयर बाज़ार में जो सचमुच हो रहाऔरऔर भी
जा रहा बहुत-बहुत कठिन साल, आगे उम्मीद!
ठीक दस ट्रेडिंग दिनों के बाद नया साल 2022 शुरू हो जाएगा। पहले दो दिन शनिवार-रविवार का अवकाश। फिर सोमवार 3 जनवरी से शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग का चक्र शुरू। यकीनन बीत रहा साल 2021 बहुत सारे लोगों के लिए बहुत-बहुत कठिन रहा है। इसमें साधारण इंसान से लेकर दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार बिल गेट्स तक शामिल हैं। गेट्स का कहना है कि 2021 उनके लिए अविश्सनीय रूप से कठिन रहा है। साथ हीऔरऔर भी
समझकर निवेश, रिस्क उतना जितना संभले!
जिन कंपनियों ने अभी तक मुनाफा कमाने का माद्दा न दिखाया हो, उनमें इस भरोसे निवेश करने का कोई मतलब नहीं कि वे भविष्य में जमकर मुनाफा कमा लेंगी। हेज़ फंड ही इस तरह का जोखिम उठा सकते हैं, मध्यवर्ग से आनेवाले साधारण निवेशक नहीं। उन्हें तो अपनी बचत को बढ़ाने के लिए बहुत संभल-संभल कर चलना होता है। इसलिए हमेशा बचत का लगभग आधा हिस्सा एफडी और पीपीएफ जैसे सुरक्षित माध्यमों में लगाते रहना चाहिए। म्यूचुअलऔरऔर भी
अर्थव्यवस्था की हालत पस्त, पर विदेशी मस्त!
हर निवेशक या ट्रेडर रिटर्न का भूखा होता है। विदेशी निवेशक तो खासकर। अमेरिका से लेकर यूरोप व जापान तक के निवेशक विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफआईपी) के जरिए भारत से हर साल कम से कम 10-12% रिटर्न कमा रहे हैं जो उनके लिए अपने देश की तुलना में बहुत-बहुत ज्यादा है। वो भी मुद्रा उतार-चढ़ाव के रिस्क को मिटाकर क्योंकि रुपया डॉलर के मुकाबले बराबर 74-75 की रेंज में चल रहा है। विदेशी निवेशकों ने हमारे शेयरऔरऔर भी







