कोई शेयर डिमांड ज़ोन में हो, रुख बढ़ने का हो, आरएसआई और मूविंग एवरेज उसके बढ़ने का संकेत दे रहे हों तो खरीद की आखिरी परख होती है कि उसके चार्ट में सबसे नीचे जो कैंडर बना है, उसका रंग व आकार क्या है। अगर ग्रीन है और आकार हैमर जैसा है तो इसका मतलब कि उसे खरीदने की आतुरता अधिक है। शेयर खुला नीचे, लेकिन लोग दिन के उच्चतम स्तर पर भी उसे खरीदने को उतारूऔरऔर भी

यूं तो शेयरों के भाव की भावी गति का अंदाज़ लगाने के लिए डिमांड-सप्लाई की समझ और अभ्यास काफी है। फिर भी इसकी पुष्टि के लिए टेक्निकल एनालिसिस के कुछ इंडीकेटरों का इस्तेमाल किया जाता है। बीएसई की चार्टिंग सुविधा में आपको एमएसीडी, आरएसआई, मूविंग एवरेज़, स्टॉकास्टिक ऑसिलेटर और चंडे विद्या जैसे बहुतेरे इंडीकेटर मिल जाएंगे। लेकिन आरएसआई (रिलेटिव स्ट्रेन्थ इंडेक्स) और मूविंग एवरेज से पुष्टि करना पर्याप्त है। पांच-दस दिन के ट्रेड के लिए आरएसआई काफीऔरऔर भी

शेयरों के भाव का पैटर्न देखने के लिए अगर आपका ब्रोकर मुफ्त में सॉफ्टवेयर उपलब्ध करा रहा है तो अच्छी बात हैं। नहीं तो अलग से कोई सॉफ्टवेयर खरीदने की ज़रूरत नहीं। बीएसई में यह सुविधा मुफ्त में दे रखी है। हर स्टॉक के साथ पेज की बाई तरफ नीचे से दूसरे नंबर पर चार्टिंग का विकल्प है जिस पर क्लिक कर आप नए पेज पर पहुंच जाते हैं। वहां भावों के साथ ही आप मूविंग औसतऔरऔर भी

भावों के चार्ट से कैसे पता लगाया जा सकता है कि किस स्टॉक में किस भाव पर देशी-विदेशी संस्थाओं की खरीद/बिक्री आ सकती है, उसमें डिमांड/सप्लाई का ज़ोन क्या है? लेकिन इस बारीकी में जाने से पहले समझ लें कि फ्लोटिंग स्टॉक कमोबेश स्थिर रहने पर भी किसी शेयर के भाव बढ़ते या गिरते क्यों हैं? बाज़ार में किसी दिन जितने शेयर बेचे जाते हैं, उतने ही खरीदे जाते हैं। हां, ट्रेड हुए शेयरों में डिलीवरी वालेऔरऔर भी

अगर आप मानव शरीर को नहीं समझते तो अच्छे डॉक्टर नहीं बन सकते। मशीनों और जटिल समीकरणों को नहीं समझते तो अच्छे इंजीनियर नहीं बन सकते। इसी तरह अगर आप कंपनी के बिजनेस को नहीं समझते तो अच्छे निवेशक नहीं बन सकते। निवेश का मतलब कुछ संख्याओं पर दांव लगाना नहीं। इसका मतलब है उस कंपनी में स्वामित्व हासिल करना जिसमें आप अपनी रिस्क पूंजी लगाते हैं। भले ही वह छोटी रकम हो, 100-200 शेयर हों। मगरऔरऔर भी