हम शेयर बाज़ार में जो भी सौदे करते हैं, उसके लिए अंततः खुद ज़िम्मेदार होते हैं। इसे स्वीकार करेंगे, तभी अपने तौर-तरीकों और रणनीति को आगे सुधार सकते हैं। लेकिन यहां तो हर कोई सफलता का श्रेय खुद लेता है, जबकि नाकामी के लिए अपने अलावा हर किसी को दोषी ठहरा देता है। इंटरनेट सुस्त था, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म सही नहीं था, बीवी-बच्चों या कुत्ते ने परेशान कर रखा था, सलाह देनेवाला गलत निकला। दरअसल, हम गलत साबितऔरऔर भी

लोग अक्सर पूछते रहते हैं कि शेयर बाज़ार कहां जाएगा। इनमें नाते-रिश्तेदार से लेकर निवेश व ट्रेडिंग से जुड़े तमाम लोग शामिल हैं। बाज़ार की अनिश्चितता के बीच निश्चितता खोजना सहज मानवीय वृत्ति या कमजोरी है। हर छोटा-बड़ा धंधेबाज़ इसका फायदा उठाता है। ऋधम देसाई बहुत बड़े मार्केट गुरु हैं। कई किताबें लिख चुके हैं। अखबारों में कॉलम लिखते हैं। भारत में मॉरगन स्टैनले जैसे बहुराष्ट्रीय निवेश बैंक के मुख्य इक्विटी रणनीतिकार हैं। उन्होंने हाल ही मेंऔरऔर भी

भारत की अर्थव्यवस्था के साथ दुनिया में चल रही ‘ब्लैक फ्राइडे’ जैसी डील चल रही है। सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने जब शुक्रवार, 29 अगस्त को घोषित किया था कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली, यानी जून तिमाही में हमारे जीडीपी की असली विकास दर 7.8% रही है, तब आम विद्वान ही नहीं, नॉर्थ ब्लॉक और भारतीय रिजर्व बैंक तक में बैठे नीतियां बनानेवाले बड़े-बड़े अफसरान तक चौंक गए थे। लेकिन इस बार 28औरऔर भी