झांकियां गणतंत्र दिवस के परेड में शोभा देती हैं, देश के आर्थिक विकास में नहीं। लेकिन मोदी सरकार ने पिछले दस साल में आर्थिक विकास के मामले में केवल झांकियों से काम चलाया है। दिक्कत यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार में भी झांकियां दिखाने से बाज़ नहीं आ रहे। उन्होंने शनिवार को एक जनसभा में कहा कि भारत में रिकॉर्ड निवेश आ रहा है। इसमें देशी और विदेशी निवेश दोनों शामिल है। प्रधानमंत्री मोदीऔरऔर भी

इन दिनों फेसबुक और एक्स (पहले के ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर शेयर बाज़ार में निवेश व ट्रेडिंग का गुर सिखाने वाले गुरुओं की बाढ़ आई हुई है। इनमें पुरुष व महिला, दोनों एक्सपर्ट शामिल हैं। यहां तक कि ज़ी बिजनेस जैसे चैनलों के एंकर भी शामिल हैं जिनके साथ मिलकर धांधली करनेवाले 15 उस्तादों पर सेबी ने ढाई महीने पहले 7.41 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। आम निवेशकों को झांसा देने के लिए पहलेऔरऔर भी

देश में बेरोज़गारों की संख्या बहुत है। छिपी हुई बेरोज़गारी उससे भी ज्यादा है। श्रमशक्ति की भागीदारी बहुत कम है। महिला श्रमशक्ति की भागादारी तो बेहद कम है। जीडीपी में कृषि का हिस्सा महज 14% है, लेकिन देश का तकरीबन 50% रोज़गार उसी में मिला हुआ है। जब तक कृषि से निकालकर लोगों को उद्योग-धंधों में नहीं लगाया जाएगा, तब तक हमारी अर्थव्यवस्था का विकास इतना नहीं हो सकता कि हम 2047 तक विकसित देश बन जाएं।औरऔर भी

हमारे देश भारतवर्ष की स्थिति पिछले दस सालों में मोदीराज के दौरान बड़ी विचित्र होती गई है। अनंत अंबानी के शादी-पूर्व जश्न में विदेशी हस्तियों व सितारे थिरकने पहुंच जाते हैं। जामनगर हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय दर्जा दे दिया जाता है और खुद भारतीय वायुसेना इस निजी समारोह के लिए पांच दिन में 600 से ज्यादा उड़ानों का इंतज़ाम देखती है। ठेले-खोमचे वाले तो छोड़िए, भिखारी तक भीख के लिए क्यूआर कोड दिखा देते हैं। मार्क ज़ुकेरबर्गऔरऔर भी