रुपया उड़ रहा है या डूब रहा है रसातल में? 16 दिसंबर को जब अमेरिकी डॉलर 91.09 रुपए का हो गया तो हर तरफ हंगामा मच गया। यह रुपए का आज तक सबसे निचला स्तर था। मज़ाक किया जाने लगा कि अंततः अमेरिकी डॉलर की विनियम दर ने उसके आईएसडी कोड़ (+1) को रुपए में भारत के आईएसडी कोड (+91) के बराबर कर दिया। उस दिन मंगलवार था। सरकार ने फौरन रिजर्व बैंक को निर्देश दिया औरऔरऔर भी

किसी ज़माने में शेयर बाज़ार में लोग भावों को भगवान मानते थे। आज भी कुछ लोग मानते हैं। लेकिन भाव के ‘भगवान’ के साथ बाज़ार में कैसा खेल होता है, इसे देखकर आप दंग रह जाएंगे। आरआरपी सेमिकंडक्टर्स केवल बीएसई में लिस्टेड है। अप्रैल 2024 में इसके शेयर का भाव ₹20 की रेंज में चल रहा था। वहां से बढ़ते-बढ़ते 10 नवंबर 2025 को ₹11,902 तक चला गया। करीब डेढ़ साल में 59,410% का रिटर्न। वो भीऔरऔर भी

जीडीपी के डेटा और उसे निकालने की पद्धति की छीछालेदर जब आईएमएफ और विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं ही नहीं, देश में सक्रिय तमाम ब्रोकरेज फर्म और निवेश बैंक तक करने लगे, तब केंद्र सरकार में डेटा के शीर्ष पर बैठे मुख्य आर्थिक सलाहकार के कानों पर थोड़ी जूं रेंगने लगी। तय हुआ है कि नए साल 2026 में 12 फरवरी को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) और 27 फरवरी की जीडीपी की नई सीरीज जारी होगी। दोनोंऔरऔर भी

सरकार को तनिक भी शर्म नहीं कि वो देश का डेमोग्राफिक डिविडेंड कहे जानेवाली युवा शक्ति को संभाल नहीं पा रही, उन्हें ढंग का रोज़गार नहीं दे पा रही। नहीं तो इतनी आसानी व मक्कारी से 12 करोड़ गरीब परिवारों से रोज़गार का हक छीनकर उन्हें निरीह याचक नहीं बना देती। उसे फर्क नहीं पड़ता कि देश में 15 से 29 साल के युवाओं में बेरोज़गारी की दर साल-दर-साल लगातार दहाई अंकों में बनी हुई है। यहऔरऔर भी