मस्तिष्क व मानसिकता
मस्तिष्क हर पल समस्याओं का हल खोजने में लगा रहता है, जबकि मान्यताओं व रूढ़ियों से बनी मानसिकता उसे खींचती रहती है। तरक्की वही लोग कर पाते हैं जिनका मस्तिष्क मानसिकता को हराता रहता है।और भीऔर भी
मस्तिष्क हर पल समस्याओं का हल खोजने में लगा रहता है, जबकि मान्यताओं व रूढ़ियों से बनी मानसिकता उसे खींचती रहती है। तरक्की वही लोग कर पाते हैं जिनका मस्तिष्क मानसिकता को हराता रहता है।और भीऔर भी
जीईआई इंडस्ट्रियल सिस्टम्स भोपाल की कंपनी है और औद्योगिक मशीनरी बनाती है जिसमें खास हैं मशीनों को ठंडा रखने के उपकरण। वह दुनिया में एयर कूलिंग सिस्टम बनानेवाली तीसरी बड़ी कंपनी है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के बी ग्रुप में उसके शेयर आते हैं। उसकी चुकता पूंजी 16.62 करोड़ रुपए है तो जाहिर है वह स्मॉल कैप कंपनी की श्रेणी में आएगी। कंपनी ने कल ही अपने शानदार नतीजे घोषित किए हैं। मार्च 2010 में खत्म चौथीऔरऔर भी
अभी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) और उसकी टीमों की फ्रेंचाइजी कंपनियों के मालिकाने की गड्डमड्ड पर तस्वीर साफ नहीं हुई है कि खुद कॉरपोरेट मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने कह दिया कि रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने आईपीएल टीमों की किसी भी फ्रेंचाइची की बैलेंस शीट में कोई गड़बड़ी नहीं पाई है और किसी भी कंपनी ने किसी को स्वेट इक्विटी नहीं दी है। राजधानी दिल्ली में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) के क्षेत्रीय निदेशकों के दो दिवसीयऔरऔर भी
शेयर बाजार बुधवार, 28 अप्रैल को अच्छी-खासी गिरावट का शिकार हो गया। वजह बताई गई कि स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने ग्रीस की रेटिंग को कचरे में डाल दिया है और पुर्तगाल की रेटिंग दो पायदान नीचे कर दी है। इससे चिंता छा गई है कि यूरोप का कर्ज संकट और गहरा हो गया है। अमेरिका में गोल्डमैन सैक्स की पूछताछ से वित्तीय क्षेत्र के उलझे हुए पेंच खुलते जा रहे हैं। अमेरिका से लेकर एशियाई बाजारों कीऔरऔर भी
पहली जुलाई 2010 के बाद से हर जीवन बीमा कंपनी को यह बताना होगा कि वह अपनी यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी (यूलिप) में एजेंट को कितना कमीशन दे रही है। बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए ने मंगलवार को दोपहर बाद सभी जीवन बीमा कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों (सीईओ) को भेजे गए सर्कुलर में कहा है, “कमीशन का उल्लेख उसी इलस्ट्रेशन में करना होगा जिसे ग्राहक को यूलिप बेचते समय एजेंट द्वारा देना अनिवार्य है।” यह सर्कुलर आईआरडीए केऔरऔर भी
देश में मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या मार्च 2010 तक बढ़कर 58 करोड़ 43 लाख 20 हजार तक पहुंच गई है। टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (टीआरएआई) के अनुसार मार्च में दो करोड़ नए मोबाइलधारक जुड़े हैं जो अब तक किसी भी महीने में हुई सबसे ज्यादा बढ़त है। फरवरी 2010 तक देश में कुल 56 करोड़ 40 लाख 20 हजार मोबाइल सब्सक्राइबर थे। इनकी संख्या मार्च में 3.6 फीसदी बढ़ गई। इसके साथ ही लैंड लाइन कोऔरऔर भी
वित्त वर्ष 2010-11 के बजट में वर्षा आधारित इलाकों के 60,000 गांवों को दलहन व तिलहन गांवों के रूप में चुना गया है। इनके लिए कुल 300 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यानी, हर गांव के लिए केवल 50 हजार रुपए रखे गए हैं। कृषि व उपभोक्ता मामलों के राज्यमंत्री प्रोफेसर के वी थॉमस ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि यह धन राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अधीन अतिरिक्त केंद्रीय सहायता के रूप मेंऔरऔर भी
देश के कुल 8 करोड़ 93 लाख 50 हजार किसान परिवारों में से 4 करोड़ 34 लाख 20 हजार परिवार कर्ज के बोझ के नीचे दबे हुए हैं। दूसरे शब्दों में देश के 48.6 फीसदी किसान किसी न किसी रूप में कर्ज लेकर अपना कामकाज चलाते हैं। यह बात राष्ट्रीय सैंपल सर्वे संगठन (एनएसएसओ) के 59वें चक्र की रिपोर्ट नंबर 498 में सामने आई है। किसानों ने जिनसे कर्ज ले रखे है, उनमें बैंकों से लेकर सूदखोरऔरऔर भी
कंपनी एक्ट 1956 के अनुसार किसी भी भारतीय कंपनी का विलय विदेशी कंपनी में नहीं हो सकता है। हां, विदेशी कंपनी का विलय भारतीय कंपनी में जरूर हो सकता है। मतलब, कोरस का विलय टाटा स्टील में हो सकता है, टाटा स्टील का कोरस में नहीं। भारती एयरटेल ज़ैन टेलिकॉम से हाथ तो मिला सकती है, उसका अपने में विलय भी कर सकती है। लेकिन वह खुद बड़ी सी बड़ी विदेशी कंपनी में विलीन नहीं हो सकतीऔरऔर भी
देश के सभी नागरिकों को अलग पहचान देने की परियोजना, आधार में किसी भी व्यक्ति के धर्म और जाति का उल्लेख नहीं होगा। इसमें व्यक्ति को उसकी उंगलियों के निशान और आंख की पुतलियों के स्वरूप से पहचाना जाएगा। इस परियोजना की संचालक यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) के चेयरमैन नंदन निलेकणी के अनुसार उनकी संस्था देशवासियों के लिए अलग नंबर जारी करेगी, कार्ड नहीं। यह नंबर पूरी जिंदगी के लिए होगा। इसमें व्यक्ति के नाम,औरऔर भी
© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom