इस साल फरवरी से म्यूचुअल फंड निवेशकों की संख्या में शुरू हुआ घटने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। यह संख्या म्यूचुअल फंड फोलियो से गिनी जाती है। म्यूचुअल फंडों के साझा मंच एम्फी (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड एसोसिएशन इन इंडिया) के आंकड़ों के अनुसार फरवरी से अगस्त 2010 के बीच म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या में 5.84 लाख की कमी आ चुकी है। फरवरी में कुल म्यूचुअल फोलियो 483.09 लाख थे, जबकि अगस्त अंतऔरऔर भी

यूं तो किसी स्टॉक में अचानक वोल्यूम का बढ़ जाना ऐसा पैमाना नहीं है जिससे मान लिया जाए तो कंपनी बड़ी पुख्ता है और उसमें निवेश अच्छा रिटर्न दे सकता है। लेकिन इससे इतना जरूर पता चलता है कि उनमें कुछ खेल शुरू हो गया है और इस बढ़ी हुई सक्रियता की कोई न कोई वजह होगी। गोविंद रबर (बीएसई कोड 509148) में कल औसत का लगभग ढाई गुना कारोबार हुआ। उसके 4.14 लाख शेयरों के सौदेऔरऔर भी

जब भी हम नया कुछ रचते हैं, रुके हुए सोते बहने लगते हैं, अंदर से ऐसी शक्तियां निकल आती हैं जिनका हमें आभास तक नहीं होता। इसलिए काम शुरू कर देना चाहिए, काबिलियत अपने-आप आ जाएगी।और भीऔर भी

चीन में ब्लॉगरों की अनुमानित संख्या सात करोड़ पर पहुंच गई है। चीन की आबादी अभी करीब 135 करोड़ है। इसमें से 20 फीसदी 14 साल से नीचे के बच्चे हैं। इस तरह 15 साल या इससे ऊपर के चीनियों की संख्या 108 करोड़ है। इसका मतलब हुआ कि चीन में समझदार हो चुके हर पंद्रह लोगों में से एक शख्स ब्लॉगिंग कर रहा है। असल में चीन के पारंपरिक मीडिया में केवल रसूख वाले लोगों केऔरऔर भी

दुनिया के सबसे बड़े निवेशक जॉर्ज सोरोस का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार में चल रही तेजी में अगर कोई रुकावट है तो वह है मुद्रास्फीति का मंडराता खतरा। रिजर्व बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाकर इसी खतरे का कम करने की कोशिश की है। मौद्रिक नीति की दूसरी त्रैमासिक समीक्षा के बीच में रिजर्व बैंक ने गुरुवार को रेपो दर 0.25 फीसदी बढ़ाकर 6 फीसदी और रिवर्स रेपो दर को 0.50 फीसदी बढ़ाकर तत्काल प्रभाव सेऔरऔर भी

रेनेसां ज्वेलरी का आईपीओ नवंबर 2007 में आया था और उसके शेयर 150 रुपए मूल्य पर जारी किए गए थे। 12 दिसंबर 2007 को लिस्टिंग के दिन यह 190 रुपए तक चला गया। लेकिन इस समय इसका भाव 73 रुपए चल रहा है। इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 95.40 रुपए (6 मई 2010) और न्यूनतम स्तर 39.60 रुपए (5 नवंबर 2009) रहा है। कंपनी अभी तक अपने लगभग सारे जेवरात अमेरिका को निर्यात करती रही हैऔरऔर भी

उसे प्रकृति कहिए या भगवान, उसकी बनाई हर चीज अपूर्ण होती है, आदर्श नहीं। आदर्श तो इंसान ने अपनी प्रेरणा के लिए बनाए हैं। इसलिए इंसान की किसी भी रचना को यथार्थ का पैमाना मानना सही नहीं।और भीऔर भी

125 अरब डॉलर कोई मामूली रकम नहीं होती। 2007-08 में देश का कुल निर्यात 163 अरब डॉलर का रहा है। लेकिन वॉशिंगटन की एक रिसर्च संस्था ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2000 से 2008 के बीच भारत से 125 अरब डॉलर का जनधन बाहर निकला है। यह धन राजनेताओं ने भ्रष्टाचार से हासिल किया था और छिपाने के लिए वे इसे विदेश में ले गए। संस्था की अर्थशास्त्री कार्ली करसियो ने अपने ब्लॉगऔरऔर भी

कृषि और गैर-कृषि क्षेत्र में आय सृजन के बीच एक तरह का संरचनागत या बुनावटी असंतुलन और बेमेल है जिस तत्काल दूर करना जरूरी है। यह मानना है कृषि राज्यमंत्री प्रो. के वी थॉमस का। उन्होंने बुधवार को प्रोसेस्ड फूड, एग्री बिजनेस व बेवरेजेज पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन की शुरुआत में कहा कि कृषि हमारे देश में 58 फीसदी से ज्यादा आबादी के लिए जीविका का मुख्य स्रोत है, लेकिन जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) मेंऔरऔर भी