उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। बजट से पहले केवल एक कारोबारी दिन बचा है। लेकिन बाजार में छाई निराशा सुरसा के मुंह की तरह विकराल होती जा रही है। निफ्टी आज साढ़े तीन फीसदी से ज्यादा गिरकर 5242 तक चला गया। सेंसेक्स भी 600 अंक से ज्यादा गिरकर 17,560 तक पहुंच गया। हालांकि बंद होते-होते बाजार थोड़ा संभला है। इस गिरावट के पीछे खिलाड़ियों के खेल अपनी जगह होंगे। लेकिन ट्रेडर और निवेशक अब नए फेरऔरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और बीपी के बीच हुआ करार बाजार का रुख मोड़ देनेवाला विकासक्रम है। लेकिन ट्रेडर और निवेशक अब भी रिलायंस के कंसेट ऑर्डर पर सेबी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यह मसला अगर सुलझ गया तो कम से कम रिलायंस में कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर तमाम एफआईआई की धारणा पटरी पर आ सकती है। अब जाकर आखिरकार मैं वित्त मंत्रालय की तरफ से शेयर बाजार को कुछ घरेलू सहयोग या सहारा देनेऔरऔर भी

बाजार इस समय एकदम दुरुस्त चल रहा है और जो भी छोटी-मोटी समस्या है, वह किसी और चीज की वजह से नहीं, बल्कि रोलओवर के चलते पैदा हुई है। बाजार के यह हफ्ता काफी अहम है। रेल बजट और आर्थिक समीक्षा पर इसी हफ्ते आनी है। हमें इन पर कायदे से गौर करने की जरूरत है। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच जेपीसी से कराने का मसला तो सुलझ ही चुका है। इसलिए संसद का गतिरोध खत्म हुआऔरऔर भी

बजट सत्र शुरू हो रहा है। इसमें ऐसे सूत्र आने जा रहे हैं जो कई महीनों से शेयर बाजार को परेशान करनेवाली चिंताओं और समस्याओं का समाधान निकालने का सबब बनेंगे। बाकी क्या कहें? एफआईआई और उनके एजेंटों ने हमेशा की तरह इस बार भी आम निवेशकों को गच्चा दिया। बाजार (निफ्टी) जब 5200 पर पहुंच गया तो उन्होंने हल्ला मचवा दिया कि अभी इसमें 10-15 फीसदी और गिरावट आनी है। निवेशक घबराकर बेचकर निकलने लगे इसऔरऔर भी

बजट में नए आर्थिक सुधारों के बारे में प्रधानमंत्री के दावे ने बाजार पर अपना असर दिखा दिया। यह वो मूलाधार है जिस पर सारे देश और निवेशक समुदाय को पूरा यकीन होना चाहिए। इस हकीकत के मद्देनजर बाजार को पहले तो गिरकर 5200 तक जाना ही नहीं चाहिए था। लेकिन ऐसा हुआ तो उसकी वजह चालबाजी या जोड़तोड़ है और, बाजार में जोड़-तोड़ की कोई काट तो है नहीं। मंदड़ियों का कार्टेल अकेले दम पर बाजारऔरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संपादकों के साथ हुई प्रेसवार्ता में हाल में उठी हर चिंता और मुद्दों पर बेबाक राय दी है। उनकी बातों से संकेत मिलता है कि आनेवाला बजट कठोर होगा, पर लोक-लुभावन उपायों के साथ। बजट कठोर होगा प्रशासन की कमियों, कालेधन और मुद्रास्फीति जैसी समस्याओं पर, जबकि वह नरम होगा टैक्स के मोर्चे पर ताकि आम आदमी के पास मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए ज्यादा आमदनी बचऔरऔर भी

शेयर बाजार और क्रिकेट के मैच ज्यादातर हमेशा फिक्स होते हैं। हालांकि छोटी-मोटी अवधि में अनजाने कारकों के चलते बाजार अक्सर चौंकाता भी है। यह बात मनगढ़ंत नहीं, बल्कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। 2006 और 2007 में देश में मुद्रास्फीति की स्थिति इससे भी खराब थी। फिर भी 2007 में बाजार ने 21,300 का नया शिखर बनाया। इसलिए अगर आज विद्वान लोग मुद्रास्फीति और ब्याज दरें बढ़ने की चिंता को भारतीय इक्विटी बाजार की गिरावट कीऔरऔर भी

मुद्रास्फीति का मुद्दा सुलझ गया। मिस्र का गुबार थमता नजर आ रहा है। अब बचा भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का मसला तो वह भी 31 मार्च 2011 तक किनारे लग जाएगा क्योंकि तब तक इस पर एफआईआर दाखिल हो चुकी होगी। जहां तक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों और संबंधित लोगों की गिरफ्तारी की बात है तो बाजार को इसकी परवाह क्यों करनी चाहिए? यह जानामाना सच है कि कॉरपोरेट क्षेत्र के बहुत से लोगों की मिलीभगत राजनेताओं केऔरऔर भी

शेयर बाजार में मची घबराहट व अफरातफरी के इस आलम हर कोई तम्बू समेटने और हिसाब-किताब दुरुस्त करने में लगा है। ब्रोकरेज हाउस अपने ग्राहकों से जबरदस्ती पूरी रकम निकालने लगे हैं। बल्कि, मुझे तो कुछ लोगों ने बताया कि हैदराबाद की किसी कंपनी के प्रवर्तक को एक प्रमुख ब्रोकिंग हाउस ने एयरपोर्ट से ही उठा लिया क्योंकि उसने उस ब्रोकरेज हाउस से अपना हिसाब-किताब नहीं निपटाया था। चेन्नई के एक प्रमुख अखबार ने खबर दी हैऔरऔर भी

निफ्टी टूटकर 5225 और सेंसेक्स 17508 तक चला गया। लेकिन मुझे जरा-सा भी गफलत नहीं है। मंदड़िये अपने हमले से बाजार का रुख बदल सकते हैं, मेरी राय नहीं। हालांकि मुझे यह मानने में कोई हिचक नहीं कि अब बाजार की नई तलहटी बनाने का काम मंदड़िये करेंगे क्योंकि इस समय सब कुछ उनके हाथ, उनके शिकंजे में है। इस बीच एलआईसी ने बाजार में खरीद शुरू कर दी है और अगले 30 दिनों में वह 15,000औरऔर भी