विशेषज्ञ करें आगाह, सरकार है मदहोश

अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय व वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) का कहना है कि प्रशांत महासागर से निकले इस बार के अल-नीनो में 69% आशंका है कि वो 1950 के बाद उभरे ऐसे किसी भी विक्षेप से ज्यादा खतरनाक व मजबूत होगा। साल के अंत तक यह अपने चरम पर होगा। इस बीच अल-नीनो बहुत ही मजबूत स्थिति में पहुंच भी चुका है। लेकिन हम भारत के लोग और हमारी भारत सरकार इस खतरे को अनदेखा कर रही है। उसी तरह जैसे डूबती नांव में किनारे पर बैठा शख्स बोले कि नांव में छेद उसकी तरफ नहीं, दूसरे किनारे पर हुआ है। भारत में इस समय साल के दक्षिण-पश्चिमी मानसून के खत्म हो जाने के बाद अल-नीनो सबसे तगड़ा प्रहार लेकर आ रहा है। यह प्रहार अभी से नए साल 2027 के तीन महीनों तक जारी रह सकता है। नतीजा अतिशय उमस व गरमी, कमज़ोर बारिश और समुद्र से उठनेवाली गरम हवाओं के रूप में दिख सकता है। भारत के 188 पर्यावरणविदों, जलवायु विशेषज्ञों व शोधकर्ताओं ने सारे देशवासियों के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों तक को आगाह किया है कि वे सुपर अल-नीनो के लिए कमर कस लें क्योंकि इससे हमारे समुद्र, जंगलों व पहाड़ों समेत संपूर्ण प्राकृतिक परिवेश पर ऐसा घनघोर असर पड़ सकता है जिसका सही-सही आकलन फिलहाल वैज्ञानिक तक नहीं कर सकते। दो चक्रवात दस्तक दे चुके हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…

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