देश के जीडीपी के बढ़ते दावों के बीच भारतीय परिवारों की बैलेंस शीट बिगड़ती जा रही है। जीडीपी के अनुपात में उनकी देनदारियां बढ़ती ही जा रही हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की सितंबर माह की बुलेटिन के मुताबिक जून 2022 में भारतीय परिवारों की वित्तीय आस्तियां ₹328.94 लाख करोड़ थीं जो तब के नॉमिनल जीडीपी की 134.3% यानी 1.34 गुना थीं। भारतीय परिवारों की वित्तीय आस्तियां मार्च 2026 में ₹490.24 लाख करोड़ हैं जो तब के नॉमिनल जीडीपी का 141.9% या उससे 1.42 गुना अधिक ठहरती हैं। इस तरह भारतीय परिवारों की आस्तियां इस दौरान 49.04% बढ़ी हैं। वहीं, इन 16 तिमाहियों में भारतीय परिवारों की वित्तीय देनदारियां या सरल शब्दों में कहें तो उनके द्वारा बैंकों व गैर-बैकिंग फाइनेंस कंपनियों वगैरह से लिया गया कर्ज ₹89.12 लाख करोड़ से 77.91% बढ़कर ₹158.55 लाख करोड़ हो गया। जून 2022 में भारतीय परिवारों पर चढ़ा ऋण जीडीपी का 36.4% हुआ करता था, जबकि मार्च 2026 में यह जीडीपी का 45.9% हो चुका है। चार साल पहले वो हर ₹100 की बचत में से ₹27 का ऋण चुकाना पड़ता था, वहीं अब ₹100 की बचत में से उसकी देनदारी ₹32 से ज्यादा हो गई है। खास बात यह है कि अधिकांश ऋण गाड़ी, मकान या दुकान जैसी आस्तियों के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा की खपत के लिए लिया गया है। अब मंगलवार की दृष्टि…
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