शेयर बाज़ार में धन का प्रवाह बढ़ता है तो सूचकांक से लेकर अलग-अलग स्टॉक्स तक बढ़ने लगते हैं। धन का प्रवाह सूखते ही सारी तेज़ी हवा हो जाती है। सितंबर 2024 के बाद विदेशी पोर्टफलियो निवेशकों (एफपीआई) के निकलने जाने से हमारे शेयर बाज़ार की यही दशा-दिशा चल रही है। एफपीआई झूमकर लौटे नहीं तो अपना शेयर बाज़ार एक कदम आगे, दो कदम पीछे चलता रहेगा। ऐसा नहीं कि विदेशी निवेशक भारत से चिढ़कर भाग रहे हैं। वे देख रहे हैं कि कौन-से देश की क्या ताकत है। अमेरिका एआई में आगे निकल गया तो चीन ने रेअर अर्थ जैसे बेहद महत्वपूर्ण खनिजों में सारी दुनिया से बाज़ी मार ली है। इसी तरह दक्षिण कोरिया, जापान व यूरोप की अपनी-अपनी ताकत है। हाल ही में हल्ला मचा कि एफपीआई भारत के बैंकिंग, बीमा व फाइनेंस क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहे हैं। बाद में इसमें कोई दम नहीं निकला। इस बीच सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वर कह रहे हैं कि भारत एआई और मैन्यूफैक्चरिंग में पिछड़ चुका है तो हमारे युवाओं को प्लम्बिंग से लेकर कारपेंट्री और केयर-गिविग जैसे कामों में दक्षता हासिल करनी चाहिए। लेकिन रसायन उद्योग में तो भारत चीन तक से आगे है। आज तथास्तु में रसायन उद्योग की ही एक कंपनी…
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