रिजर्व बैंक के अनुसार उसके पास इस समय 880.52 टन सोना है। इसमें से 940 किलो सोना उसने पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में खरीदा। दुनिया में सबसे ज्यादा 8133 टन सोना अमेरिका के केंद्रीय बैंक के पास है। उसके बाद जर्मनी के पास 3350 टन, इटली के पास 2452, फ्रांस के पास 2437 टन, रूस के पास 2330 टन, चीन के पास 2300 टन और स्विटज़रलैंड के पास 1040 टन सोना है। यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) तक ने 2814 टन सोना खरीदकर अपने खजाने में रखा हुआ है। असल में 2020 से 2024 के दौरान बहुत सारे देशों ने जमकर सोना खरीदा सबसे ज्यादा 1948 टन सोना रूस और उसके बाद 1885 टन सोना चीन से खरीदा, जबकि भारत ने 518 टन और तुर्किए ने 501 टन सोना खरीदा। भारत और तुर्किए, दोनों इस समय दुनिया की दो फ्रेज़ाइल या भंगुर अर्थव्यवस्था हैं। सवाल उठता है कि जब रूस और चीन ने जमकर सोना खरीदा तो ‘दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था’ भारत इतना पीछे क्यों रह गया? कहीं ऐसा तो नहीं नहीं कि आंकड़ों की बाज़ीगरी से बनाई गई झांकी में अंदर पोल ही पोल था? दिक्कत यह है कि हमारे यहां सरकार की संगत में रिजर्व बैंक भी अर्धसत्य ही नहीं, पूरा झूठ बोलना सीख गया है और बराबर बोले जा रहा है। अब बुधवार की बुद्धि…
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