देश में विदेशी मुद्रा का संकट चल रहा है। कहने को देश में आया प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बीते वित्त वर्ष 2025-26 में 94.53 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। लेकिन विदेशी और देशी कंपनियां जितनी विदेशी मुद्रा बाहर ले जा रही हैं, उसे घटाने के बाद शुद्ध एफडीआई मात्र 7.65 अरब डॉलर रह गया। अनिवासी भारतीयों तक ने इस साल मार्च में भारतीय बैंकों से 1.93 अरब डॉलर की डिपॉजिट निकाल ली। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) इस साल जनवरी से अब तक भारतीय शेयर बाजार से 28.63 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। इस दौरान बॉन्डों से उन्होंने 0.42 अरब डॉलर ही निकाले हैं। लेकिन कमाल देखिए कि सरकार ने बाकायदा अध्यादेश लाकर 1 अप्रैल 2026 की पिछली तारीख से सरकारी बॉन्डों में एफपीआई या एफआईआई निवेश पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स, 30% शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स और 20% विदहोल्डिंग टैक्स खत्म कर दिया। एक तो यह कदम उसी तरह का है कि चोट सिर पर लगी हो और मलहम घुटनों पर लगाया जाए। दूसरे, यह देशी निवेशकों के साथ किया गया भेदभाव है। तीसरे, यह उसी तरह की टुकड़खोर नीति है जैसे महीने का पांच किलो मुफ्त राशन देकर देश के 81.35 करोड़ वाशिंदों को लाभार्थी बना दिया गया और टैक्स रियायत व पीएलआई स्कीम से निजी कंपनियों को निवेश बढ़ाने का लालच दिया गया। अब सोमवार का व्योम…
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