भारत के पास प्रतिभा है, मांग है और व्यापक डिजिटल तंत्र है। लेकिन भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र में इन मजबूत पहलुओं को समाहित करने की सामर्थ्य तो छोड़िए, नीयत तक नहीं है। वे तो भारत छोड़ बाहर निवेश करते जा रहे हैं। यही वजह है कि एफडीआई के रूप में देश में जितनी पूंजी आ रही है, कमोबेश उतनी ही भारतीय पूंजी बाहर निकल जा रही है तो शुद्ध एफडीआई की स्थिति दयनीय है। अनिवासी भारतीयों तक ने इस साल मार्च महीने में भारतीय बैंकों से लगभग 2 अरब डॉलर की डिपॉजिट निकाल ली। रिजर्व बैंक के डेटा के मुताबिक फरवरी में एनआरआई जमा 167.58 अरब डॉलर थी। यह मार्च अंत तक घटकर 165.65 अरब डॉलर रह गई। मॉरगन स्टैनली कैपिटल इंटरनेशनल (एसीएसआई) ने उभरते बाज़ारों के सूचकांक में भारत का भार पिछले साल के 19% से घटाकर 11.9% कर दिया है। विदेशी निवेशक इसलिए भी भारतीय शेयर बाज़ार से निकलते जा रहे हैं। भारत के पास अब निजी खपत की ही कहानी बची है। लेकिन निजी खपत भी जीडीपी की नई सीरीज़ में 2025-26 में घटकर ₹195.8 लाख करोड़ पर आ गई है, जो पुरानी सीरीज़ के ₹219.6 लाख करोड़ से 10.84% कम है। ऐसी ही आधारभूत कमज़ोरियों से भारतीय शेयर बाज़ार दुनिया के पांच सबसे बड़े शेयर बाज़ारों की सूची से बाहर छिटक गया है। बाज़ार पूंजीकरण में वो ताईवान जैसे छोटे-से देश से पिट गया। अब शुक्रवार का अभ्यास…
यह कॉलम सब्सक्राइब करनेवाले पाठकों के लिए है.
'ट्रेडिंग-बुद्ध' अर्थकाम की प्रीमियम-सेवा का हिस्सा है। इसमें शेयर बाज़ार/निफ्टी की दशा-दिशा के साथ हर कारोबारी दिन ट्रेडिंग के लिए तीन शेयर अभ्यास और एक शेयर पूरी गणना के साथ पेश किया जाता है। यह टिप्स नहीं, बल्कि स्टॉक के चयन में मदद करने की सेवा है। इसमें इंट्रा-डे नहीं, बल्कि स्विंग ट्रेड (3-5 दिन), मोमेंटम ट्रेड (10-15 दिन) या पोजिशन ट्रेड (2-3 माह) के जरिए 5-10 फीसदी कमाने की सलाह होती है। साथ में रविवार को बाज़ार के बंद रहने पर 'तथास्तु' के अंतर्गत हम अलग से किसी एक कंपनी में लंबे समय (एक साल से 5 साल) के निवेश की विस्तृत सलाह देते हैं।
इस कॉलम को पूरा पढ़ने के लिए आपको यह सेवा सब्सक्राइब करनी होगी। सब्सक्राइब करने से पहले शर्तें और प्लान व भुगतान के तरीके पढ़ लें। या, सीधे यहां जाइए।
अगर आप मौजूदा सब्सक्राइबर हैं तो यहां लॉगिन करें...
