मार्च 2025 में खत्म वित्त वर्ष 2024-25 में देश का नॉमिनल जीडीपी ₹330.68 लाख करोड़ रहा है। यह 85.65 रुपए प्रति डॉलर की मौजूदा विनिमय दर पर 3.861 ट्रिलियन डॉलर निकलता है। रिजर्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2025 के अंत में देश का विदेशी ऋण 736.3 अरब डॉलर है जो जीडीपी का 19.07% बनता है। वहीं, भारत सरकार पर इस वक्त चढ़ा कुल ऋण ₹181.74 लाख करोड़ है। यूं तो यह जीडीपी का 54.96% ही निकलता है। लेकिन आईएमएफ के डेटा के मुताबिक भारत पर चढ़ा कुल ऋण मार्च 2025 तक जीडीपी का 82.3% रहा है। आप कह सकते हैं कि जब चीन का ऋण-जीडीपी अनुपात 96% और अमेरिका का 124% है तो भारत के लिए चिंता करने की क्या बात! लेकिन अमेरिका पर चढ़े कुल 36 ट्रिलियन डॉलर के ऋण का करीब दो-तिहाई हिस्सा वहां के नागरिकों, बैंकों व कॉरपोरेट क्षेत्र ने स्वेच्छा से बॉन्ड के जरिए लगाया है, जबकि एक-तिहाई विदेशी सरकारों ने। वहीं, भारत सरकार अपने ऋण का करीब 22% हिस्सा लघु बचत स्कीमों में आम लोगों से खींचती है, जबकि करीब 74% हिस्सा वो बॉन्डों से जुटाती है जिनमें बैंकों को नियमतः कुल जमा का कम से कम 18% हिस्सा लगाना होता है। वैसे, उन्होंने 40% तक लगा रखा है। इस तरह सरकार का 96% ऋण जनता की बचत या डिपॉजिट से ही आता है। अब बुधवार की बुद्धि…
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