शेयर बाज़ार में ट्रेडरों के बीच अरसे से कहा जाता रहा है कि भाव ही भगवान है। लेकिन इन भावों को इंसान ही चलाते हैं। हो सकता है कि वे देशी-विदेशी निवेश संस्थाओं, म्यूचुअल फंडों या बीमा कंपनियों में काम करते हों, प्रोफेशनल ट्रेडर हों या ऐसे ट्रेडर हों जो सुबह से शाम तक शेयर बाज़ार में डटे रहते हैं। यहां तक कि अल्गोरिदम ट्रेडिंग के पीछे भी अंततः इंसान ही होते हैं। इन सबकी ट्रेडिंग की शैली अलग है, अंदाज़ अलग है, पैटर्न अलग है। इनकी सक्रियता का सम्मिलित प्रभाव ही भाव बनकर सामने आता है और वो ही मिनट, घंटे, दिन व सप्ताह के भावों के चार्ट में झलकता है। अब सोमवार का व्योम…
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