गुर्राए तो शेर, काम तो भीगी बिल्ली

सरकार ध्यान भटकाने और लीपापोती में लगी है। लेकिन हकीकत यही है कि बम्पर बहुमत के बावजूद मोदी सरकार ने पहले बजट में जो ढीलापन दिखाया है, उससे उद्योग व निवेश जगत काफी निराश है। कहां तो उम्मीद थी कि वह बड़े स्तर के आर्थिक सुधार करेगी और कहां वह किसी चुनावी साल की तरह वोटरों को लुभाने की कसरत करती रही। इससे उनका जनादेश ही संदेह के घेरे में आ गया है। अब शुक्रवार का अभ्यास…

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