देश का जीडीपी महज संख्याओं का खेल नहीं। हर देशवासी के साथ उद्योग-धंधों, व्यापार और सरकारों तक की हरकतों से इसका वास्ता है। इसके सारे घटकों को डेटा सर्वसुलभ और पारदर्शी हो तो इसका हिसाब निकालना कोई रॉकेट साइंस नहीं। किसी अवधि में घरों से लेकर बिजनेस तक जो भी माल व सेवाएं सृजित हुई हैं, उसमें सरकार को मिला टैक्स जोड़कर उसके द्वारा दी गई सब्सिडी घटा दें तो जीडीपी निकल आता है। इसका एक स्वरूप उस समय के बाज़ार मूल्य पर निकालते हैं जिसे नॉमिनल जीडीपी कहते हैं। दूसरे स्वरूप में आधार वर्ष के स्थिर मूल्य पर मात्रा के अंतर को मापा जाता है जिसे रीयल जीडीपी कहते हैं जो मुद्रास्फीति को हटाकर अर्थव्यवस्था का आकार बताता है। दिक्कत यह है कि मोदी सरकार जीडीपी का हिसाब बताने में पारदर्शिता नहीं बरतती। जैसे, पुरानी सीरीज में आधार वर्ष 2011-12 के स्थिर मूल्य पर वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में रीयल जीडीपी ₹47,88,623 करोड़ और तब के बाज़ार मूल्य पर नॉमिनल जीडीपी ₹86,05,365 करोड़ था तो सरकार को साफ बताना चाहिए था कि ऐसा इसलिए क्योंकि दरमियानी 14 सालों में महंगाई 79.70% बढ़ गई। लेकिन वह ऐसा करती तो थोक मुद्रास्फीति को डिफ्लेटर बनाकर चलने के उसके शातिराना खेल का भंडाफोड़ हो जाता। क्या है डिफ्लेटर का पुराना और नया खेल? अब शुक्रवार का अभ्यास…
यह कॉलम सब्सक्राइब करनेवाले पाठकों के लिए है.
'ट्रेडिंग-बुद्ध' अर्थकाम की प्रीमियम-सेवा का हिस्सा है। इसमें शेयर बाज़ार/निफ्टी की दशा-दिशा के साथ हर कारोबारी दिन ट्रेडिंग के लिए तीन शेयर अभ्यास और एक शेयर पूरी गणना के साथ पेश किया जाता है। यह टिप्स नहीं, बल्कि स्टॉक के चयन में मदद करने की सेवा है। इसमें इंट्रा-डे नहीं, बल्कि स्विंग ट्रेड (3-5 दिन), मोमेंटम ट्रेड (10-15 दिन) या पोजिशन ट्रेड (2-3 माह) के जरिए 5-10 फीसदी कमाने की सलाह होती है। साथ में रविवार को बाज़ार के बंद रहने पर 'तथास्तु' के अंतर्गत हम अलग से किसी एक कंपनी में लंबे समय (एक साल से 5 साल) के निवेश की विस्तृत सलाह देते हैं।
इस कॉलम को पूरा पढ़ने के लिए आपको यह सेवा सब्सक्राइब करनी होगी। सब्सक्राइब करने से पहले शर्तें और प्लान व भुगतान के तरीके पढ़ लें। या, सीधे यहां जाइए।
अगर आप मौजूदा सब्सक्राइबर हैं तो यहां लॉगिन करें...
