हफ्ते के पहले दिन सोमवार को घोषित हुआ कि देश के जीडीपी की रीयल या सच्ची विकास दर, महंगाई के असर को खत्म करने के बाद 7.8% रही है। मतलब भारतीय अर्थव्यवस्था पश्चिम एशिया के संकट के बावजूद बमबम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसे निजी उपलब्धि बताकर अपनी पीठ थपथपा रहे है। फिर भी हमारा शेयर बाज़ार मायूसी में जकड़ा रहा। हफ्ते के आखिरी ट्रेडिंग दिन, शुक्रवार तक निफ्टी-50 सूचकांक सोमवार के 24,080.40 से 0.76% नीचे उतरकर 23,897.70 पर बंद हुआ। आखिर माज़रा क्या है? देश के पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग का कहना है कि रीयल विकास दर मूलतः डेरिवेटिव है। असली विकास दर तो नॉमिनल है जो तब के बाज़ार मूल्यों पर निकाली जाती है। बाकी तो सरकार के बनावटी डिफ्लेटर का खेल है जिससे तथाकथित ‘रीयल’ विकास दर को चमका दिया जाता है। उनका आरोप है कि मोदी सरकार ने 2023-24 में लोकसभा चुनाव में झांकी बनाने के लिए जीडीपी को बढ़ाकर दिखाया। अब उसे घटाकर भविष्य में बढ़ाने का सरंजाम कर रही है। उनके आरोपों का जवाब सांख्यिकी मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग दे रहे हैं। मार मची है, देश मौज ले रहा है। पेश है तथास्तु में आज की कंपनी…
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