बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को डेरिवेटिव सौदों में फिजिकल सेटलमेंट अपनाए हुए दो महीने से ज्यादा बीत चुके हैं। 1 फरवरी 2011 को एक्सचेंज ने घोषित किया था कि अब से 13 अप्रैल को या उसके बाद एक्सपायर होनेवाले सभी मौजूदा सिंगल स्टॉक फ्यूचर्स व ऑप्शंस कांट्रैक्ट डिलीवरी आधारित होंगे। नोट करने की बात यह है कि एक तो यह जुलाई 2010 में पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी द्वारा घोषित की गई व्यवस्था थी। इसलिए इसे देर-सबेरऔरऔर भी

आर्थिक समीक्षा ने अच्छे बजट की जमीन तैयार कर दी है। वित्त वर्ष 2011-12 में 9 फीसदी आर्थिक विकास की दर। कृषि और इंफ्रास्ट्रक्टर पर जोर। चालू खाते के घाटे को कम करने की चिंता जो वित्त मंत्री को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को खुश रखने को मजबूर किए रहेगी। मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की इजाजत। बीमा व बैंकिंग क्षेत्र के सुधार। काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कदम। ऊपर से हल्के सेऔरऔर भी

शेयर ब्रोकर इस कोशिश में लगे हैं कि सरकार शेयर सौदों पर लगनेवाले सिक्यूरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) को कम कर दे। एसटीटी को 2004-05 से लागू किया गया है और इनकी मौजूदा दर 0.125 फीसदी है। यह खरीद-बिक्री दोनों ही तरह के शेयर सौदों पर लगता है। अपनी मांग लेकर ब्रोकरों का प्रतिनिधिमंडल वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से भी मिलने वाला है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक रवि नारायण ने एक समारोह के दौरान मीडिया सेऔरऔर भी