मुर्गा बांग न दे, तब भी सुबह का होना तो नहीं रुकता। इसी तरह सही सलाह न मिलने से लोगों का निवेश करना नहीं रुकता। वे भविष्य की सुरक्षा के लिए अपनी वर्तमान बचत को दांव पर लगाते रहते हैं, जोखिम उठाते रहते हैं। लेकिन कुछ तो नासमझी व लालच का तकाजा और बहुत कुछ हमारे नियामक तंत्र के लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के चलते हर दिन लाखों देशवासी करोड़ों गंवा रहे हैं। स्पीक एशिया तो एकऔरऔर भी

लंबे समय की बात छोड़िए, आपको तो थोड़े समय के लिए भी बाजार की दशा-दिशा को लेकर फिक्र करने की जरूरत नहीं है। अगर हम वित्त वर्ष 2011-12 के अनुमानित लाभ को आधार बनाएं तो भारतीय बाजार अभी 16 के पी/ई अनुपात पर चल रहा है जो इक्विटी मूल्यांकन के वैश्विक मापदंड से काफी नीचे है। इसलिए उन लोगों को कहने दीजिए, जो कहते हैं कि भारतीय बाजार महंगा हो चला है और इसमें अब गिरावट आनीऔरऔर भी