हालात के नहीं, अपने दोष निकालना
आप गलत राह पर हो, इसका गहरा अहसास जितनी जल्दी हो जाए, उतनी ही जल्दी आप वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग जैसे तमाम कार्यक्षेत्रों में अपने नकारात्मक तौर-तरीकों को सुधार सकते हो। वहीं, अगर आप अपने बजाय हालात में दोष निकालते हैं तो एक तरह से हाथ खड़े कर देते हैं और कहीं न कहीं मान बैठते हैं कि आपके तईं कुछ नहीं हो सकता। तब आप वही-वही गलती दोहराते रहने को अभिशप्त हैं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
