आईएसएमटी की कहानी तीन दशक से ज्यादा पुरानी है। असैनिक एयरक्राफ्ट बनानेवाली कंपनी तनेजा एयरोस्पेस के प्रवर्तक बलदेव राज तनेजा इसके कर्ताधर्ता हैं। 1980 में बनी तो नाम इंडियन सीमलेस मेटल ट्यूब्स था। बीस बाद साल 2000 अपनी एक प्रतिद्वंद्वी कंपनी कल्याणी सीमलेस ट्यूब्स का अधिग्रहण कर लिया। 2005 में अपनी ही इकाई को मिलाने के बाद आईएमएमटी का नाम धर लिया। 2007 में उसने स्वीडन की बेहद पुरानी कंपनी स्ट्रक्टो हाइड्रॉलिक्स का अधिग्रहण कर लिया। कंपनीऔरऔर भी

आप सभी को चैत्र शुक्‍ल पक्ष प्रतिपदा यानी, नव संवत्सर के पहले दिन गुड़ी पडवा के साथ ही उगाड़ी, चेटीचंद, नवरेह और साजिबू चेइराओबा पर्व की बहुत-बहुत बधाइयां। वाकई, अपने देश की इतनी विविधता देख मन मगन हो जाता है। लेकिन आज का दिन थोड़े दुख का दिन भी है। आज भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत का दिन है। यूं तो शहीदों का बलिदान दिवस दुख मनाने का नहीं, बल्ले-बल्ले करने का होता है। लेकिनऔरऔर भी

स्वीडन से निकले और ब्रिटेन में जमे ईसाब समूह की भारतीय सब्सडियरी ईसाब इंडिया के बारे में हमने सबसे पहले यहां करीब तेरह महीने 16 फरवरी 2011 को लिखा था। तब इसका दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर 480.30 रुपए तक चल रहा था। करीब सात महीने बाद 14 सितंबर 2011 को यह 591.30 रुपए तक चला गया। सात महीने में 23 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न। लेकिन उसके बाद गिरते-गिरते 20 दिसंबर 2011 को 422 रुपएऔरऔर भी

गिरते हैं घुड़सवार ही मैदाने जंग में। किरण मजूमदार-शॉ की कंपनी बायोकॉन को करीब हफ्ते भर पहले तगड़ा झटका लगा, जब फाइज़र ने उसके बनाए इंसूलिन उत्पादों को अमेरिका में बेचने का करार रद्द कर दिया। दोनों की तरफ से जारी साझा बयान में कहा गया, “बायोसिमिलर बिजनेस में अपनी अलग प्राथमिकताओं के चलते कंपनियां इस नतीजे पर पहुंची हैं कि स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने में ही उनका सर्वोपरि हित है।” धंधे में रिश्ते बनते हैं,औरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए हम ऐसे स्टॉक्स चुनते हैं जो खरीद-फरोख्त के असर से घट-बढ़ सकते हैं, जबकि निवेश में हम ऐसी कंपनियों को चुनते हैं जिनका धंधा पुख्ता आधार पर खड़ा हो और जिसमें बढ़ने की भरपूर गुंजाइश हो। दिक्कत है कि हममें से 99 फीसदी लोग ट्रेडिंग की मानसिकता रखते हैं। छाया के पीछे भागते हैं और माया गंवाते रहते हैं। यह रुख न तो देश की अर्थव्यवस्था और न ही हमारे दीर्घकालिक आर्थिक स्वास्थ्य केऔरऔर भी

वादों की हकीकत को पहचानता है बाजार। इसीलिए भारतीय रेल के कामकाज से जुड़े तमाम स्टॉक कल, रेल बजट में की गई ठीकठाक घोषणाओं के बावजूद लुढकते चले गए। इसका अपवाद था तो इकलौता बीईएमएल जिसका नाम पहले भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड हुआ करता था। वैसे भी, बीईएमएल का वास्ता रेल मंत्रालय से नहीं, रक्षा मंत्रालय से है। वह रेलवे को माल सप्लाई जरूर करती है। लेकिन ज्यादा नहीं। इसलिए बीईएमएल के शेयर अगर मामूली बढ़त लेकरऔरऔर भी

फरवरी महीने में शेयर बाजार की गति को दिखानेवाला सूचकांक, निफ्टी 4 फीसदी बढ़ गया। लेकिन इस बढ़त से म्यूचुअल फंडों की आस्तियां (एयूएम) महज 2 फीसदी बढ़ी हैं। नोट करें कि यह म्यूचुअल फंड स्कीमों में आए निवेश का नहीं, बल्कि बाजार के बढ़ने से उनके निवेश में हुई बढ़त या मार्क टू मार्केट उपबल्धि को दर्शाता है। बाजार के बढ़ने की वजह फरवरी में एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की तरफ से शेयरों में किया गयाऔरऔर भी

ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज में निवेश की सलाह हमने सबसे पहले करीब नौ महीने पहले 15 जून 2010 को दी थी। उस वक्त यह शेयर बहुत उछलकूद मचा रहा था। महीने भर में ही 40 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 445 रुपए पर पहुंच चुका था। इस समय भी इसमें तेज हरकत है। 10 फरवरी को इसने दिसंबर तिमाही के नतीजे घोषित किए, तब इसका बंद भाव 493.95 रुपए था। उसके बाद करीब एक महीने में यह 14.44 फीसदी बढ़करऔरऔर भी

पेट्रोन इंजीनियरिंग नाम के अनुरूप इंजीनियरिंग व कंस्ट्रक्शन के काम में लगी कंपनी है। तेल व गैस, रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल, उर्वरक, सीमेंट व बिजली जैसे उद्योगों को अपनी सेवाएं बेचती है। यह 1976 में बनी कंपनी है। चार साल पहले तक पूरी तरह भारतीय कंपनी हुआ करती थी। लेकिन जनवरी 2008 के बाद से इसका नियत्रंण एक ब्रिटिश कंपनी काज़ स्ट्रॉय सर्विसेज (केएसएस) के हाथ में चला गया है। वैसे तो केएसएस के पास कंपनी की 20.13 फीसदीऔरऔर भी

यूं तो महज कागज की एक पट्टी होता है लिटमस। लेकिन द्रव में डालते ही खटाक से बता देता है कि वो अम्ल है या क्षार। काश! शेयर बाजार के लिए भी ऐसा कोई इकलौता लिटमस टेस्ट होता जो बता देता कि कोई कंपनी निवेश के काबिल है या नहीं। मुश्किल यह है कि यहां वर्तमान को ही नहीं, भविष्य को भी परखा जाता है। कई टेस्ट हैं। लेकिन वे आंशिक सच ही दिखाते हैं। अगर हमऔरऔर भी