आईएसएमटी 26 से 40 होगा कैसे?

आईएसएमटी की कहानी तीन दशक से ज्यादा पुरानी है। असैनिक एयरक्राफ्ट बनानेवाली कंपनी तनेजा एयरोस्पेस के प्रवर्तक बलदेव राज तनेजा इसके कर्ताधर्ता हैं। 1980 में बनी तो नाम इंडियन सीमलेस मेटल ट्यूब्स था। बीस बाद साल 2000 अपनी एक प्रतिद्वंद्वी कंपनी कल्याणी सीमलेस ट्यूब्स का अधिग्रहण कर लिया। 2005 में अपनी ही इकाई को मिलाने के बाद आईएमएमटी का नाम धर लिया। 2007 में उसने स्वीडन की बेहद पुरानी कंपनी स्ट्रक्टो हाइड्रॉलिक्स का अधिग्रहण कर लिया।

कंपनी फिलहाल सीमलेस ट्यूब और बियरिंग स्टील बनाती है। उसके उत्पादन संयंत्र महाराष्ट्र के बारामती, अहमदनगर और जेजुरी में हैं। सीमलेस ट्यूब बनाने की उसकी क्षमता 4.65 लाख टन सालाना है। जिंदल समूह की कंपनी महाराष्ट्र सीमलेस के बाद वह देश में सीमलेस ट्यूब की दूसरी सबसे बड़ी निर्माता है। वहीं बियरिंग स्टील के घरेलू बाजार में उसकी हिस्सेदारी 70 फीसदी से ज्यादा है। लेकिन कंपनी की प्रगति इधर दुरुस्त नहीं चल रही। बीते वित्त वर्ष 2010-11 में उसकी बिक्री तो 35.96 फीसदी बढ़कर 1611.36 करोड़ रुपए हो गई, थी, लेकिन शुद्ध लाभ मात्र 1.01 फीसदी बढ़कर 75.36 करोड़ रुपए पर पहुंच सका। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में उसका शुद्ध लाभ जून तिमाही में 0.81 फीसदी ही बढ़ा। उसके बाद सितंबर तिमाही में यह 56.49 फीसदी गिर गया।

दिसंबर तिमाही में हालत और बिगड़ गई। 6 फरवरी को घोषित नतीजों के अनुसार दिसंबर तिमाही में उसकी बिक्री 22.47 फीसदी बढ़कर 464.51 करोड़ रुपए हो गई, लेकिन शुद्ध लाभ 87.86 फीसदी घटकर 1.77 करोड़ रुपए पर आ गया। दिसंबर 2010 की तिमाही में उसका शुद्ध लाभ 14.58 करोड़ रुपए था। अभी जिस तरह कोयला ब्लॉकों के आवंटन को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं, उसमें कोयले को ईंधन के बतौर इस्तेमाल करनेवाली इस कंपनी के प्रति भी माहौल खराब ही रहेगा। कमाल की बात है कि धंधे में गिरावट और बिगले माहौल के बीच भी देश की प्रमुख रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने परोक्ष रूप से इसमें निवेश की सलाह दी है।

क्रिसिल ने फंडामेंटल्स के आधार पर जहां आईएसएमटी को अन्य लिस्टेड कंपनियों से अच्छा मानते हुए पांच में तीन का ग्रेड दिया है, वहीं मूल्यांकन के आधार पर पांच में पांच का सर्वोत्तम ग्रेड दिया है। उसका कहना है कि इस समय 26 रुपए के आसपास ट्रेड हो रहे इसके शेयर का एक साल का उचित मूल्य 40 रुपए है। हालांकि क्रिसिल रिसर्च का कहना है कि इस ग्रेड का मतलब खरीदने, बेचने या होल्ड करने की सलाह नहीं है। लेकिन अगर साल भर का उचित मूल्य (फेयर वैल्यू) 40 रुपए बताया जाए तो कोई भी निवेशक अपने धन को 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ाने के लिए लपक ही पड़ेगा।

आईएसएमटी का पांच रुपए अंकित मूल्य का शेयर शुक्रवार 23 मार्च को बीएसई (कोड – 532479) और एनएसई (कोड – ISMTLTD) दोनों में ही 26.05 रुपए पर बंद हुआ है। कंपनी की प्रति शेयर बुक वैल्यू ही इससे ज्यादा 42.23 रुपए है। कंपनी का दिसंबर तक के बारह महीनों का कंसोलिडेटेड ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 5.13 रुपए है। इस तरह उसका शेयर फिलहाल मात्र 5.10 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। इन अनुपातों के आधार पर भी कोई इस कंपनी में निवेश की सलाह दे सकता है।

क्रिसिल का कहना है कि निर्यात कारोबार में सुधार के कारण वित्त वर्ष 2013-14 में कंपनी के क्षमता इस्तेमाल का स्तर 40 फीसदी के मौजूदा स्तर से बढ़कर 47 फीसदी हो जाएगा। इस बीच चंद्रपुर में उसका अपने इस्तेमाल का बिजली संयंत्र भी चालू हो जाएगा। इससे कंपनी के लाभ मार्जिन में 100 आधार अंकों (एक फीसदी) का इजाफा हो सकता है। क्रिसिल रिसर्च का आकलन है कि 2013-14 तक कंपनी की बिक्री 12.3 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ती हुई 2500 करोड़ रुपए पर पहुंच जाएगी। इस दौरान उसका शुद्ध लाभ 100 करोड़ रुपए और ईपीएस भी 8.1 रुपए पर पहुंच जाएगा। कंपनी ने बीते वित्त वर्ष 2010-11 में नेटवर्थ पर 15 फीसदी का रिटर्न हासिल किया था। 2013-14 में इसके 16 फीसदी पर पहुंच जाने की उम्मीद है। क्रिसिल का कहना है कि उसने आईएसएमटी के शेयर का वाजिब मूल्य 40 रुपए इस साल और अगले साल के अनुमानित ईपीएस से क्रमशः 8.4 और 6.6 गुना (पी/ई अनुपात) मानकर निकाला है।

आप यकीनन क्रिसिल जैसी नामी और विशालकाय रिसर्च टीम की इस रिसर्च पर यकीन कर सकते हैं। लेकिन जिस कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी/नेटवर्थ (आरओई) 20 फीसदी से कम हो, वह हमें कतई नहीं जमती। सवाल है कि हम आईएसएमटी में क्यों निवेश करें, जबकि टाटा स्टील जैसी कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी इससे कहीं ज्यादा 21.39 फीसदी हो और उसका शेयर 10.95 के पी/ई पर ट्रेड हो रहा हो? बाकी दांव लगाना आपकी मर्जी। वैसे, आईएसएमटी का शेयर पिछले 52 हफ्तों में 60.40 रुपए का शिखर (8 अप्रैल 2011) और 22.25 रुपए की तलहटी (21 दिसंबर 2011) पकड़ चुका है। कंपनी की 73.25 करोड़ रुपए की इक्विटी में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 51.70 फीसदी है, जबकि एफआईआई का निवेश 4.54 फीसदी और डीआईआई का निवेश 9.97 फीसदी है। अच्छी बात यह है कि प्रवर्तकों के अपने कोई शेयर गिरवी नहीं रखे हैं। हालांकि उसका ऋण-इक्विटी अनुपात 1.85 और ब्याज कवरेज 2.05 है जिसे कतई अच्छा नहीं माना जाता।

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