साल भर पहले हमने यहीं पर पॉलि मेडिक्योर में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 240 के आसपास था। अभी 14 मई को 574.85 का शिखर छूने के बाद फिलहाल 512.50 रुपए पर है। 100% से ज्यादा रिटर्न दिलानेवाली ऐसी तमाम सलाहें तब मुफ्त हुआ करती थीं। लेकिन खुली मुठ्ठी में रखे हीरे का मूल्य लोगों ने नहीं समझा तो मुठ्ठी बंद करनी पड़ी। आज ऐसी कंपनी जो सीधे वॉरेन बफेट से ताल्लुक रखती है।औरऔर भी

क्या आपको अंदाज़ा है कि शेयर बाज़ार में हर दिन कितना धन इधर से उधर होता है। 1.30 लाख करोड़ रुपए से लेकर 1.40 लाख करोड़ रुपए। ध्यान दें यहां लाख या करोड़ की नहीं, लाख करोड़ की बात हो रही है, जिसे अंग्रेज़ी में ट्रिलियन कहते हैं। यह अमीरों का धन है, एफआईआई, डीआईआई का धन है। क्या इसमें से कोई पढ़ा-लिखा समझदार बेरोज़गार दिन के एक-दो हज़ार भी नहीं कमा सकता? आप कहेंगे कि आजऔरऔर भी

यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के नतीजे 14 मई को आए। पता चला कि मार्च 2013 की तिमाही में डूबत ऋणों के चलते उसका शुद्ध लाभ 79.11% घटकर 31.18 करोड़ रुपए पर आ गया। लेकिन उसका शेयर पिछले तीन दिनों में 1.63% बढ़कर कल 59.20 रुपए पर पहुंच गया। भाव कभी झूठ नहीं बोलते। फिर खराब नतीजों से वो गिरे क्यों नहीं? ऐसे सवाल ही शेयर बाजार के बारे में हमारी समझ को बढ़ाएंगे। अब नज़र आज पर…औरऔर भी

भारत ही नहीं, सारी दुनिया के शेयर बाज़ार कुलांचे मार रहे हैं। क्या अर्थव्यवस्था ही हालत सुधर गई? क्या भविष्य बड़ा सुनहरा दिखने लगा? कंपनियों के मुनाफे बहुत बढ़ गए? अपने यहां कहा जा रहा है कि मुद्रास्फीति इतनी घट गई है कि रिजर्व बैंक 17 जून को ब्याज दर में 0.25% और 30 जुलाई को 0.25% कमी करेगा। इसलिए सेंसेक्स और निफ्टी जनवरी 2011 के बाद के शिखर पर हैं। पर असली वजह कुछ और है…औरऔर भी

शेयर बाज़ार कोई डॉन नहीं, जिसको पकड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन हो। हालांकि वो किसी का जमूरा भी नहीं। दिग्गज ऑपरेटर तक यहां दिवालिया हो जाते हैं। लेकिन यहां प्रवाह का तर्क चलता है। अगर किसी तरह सप्लाई और डिमांड की सही-सही स्थिति समझ लें तो घटने या बढ़ने का पता पहले से लग जाएगा। आखिर ऑपरेटर, इनसाइडर या बड़े संस्थान ऑर्डर जेब में नहीं, बाज़ार में ही तो रखते हैं। उतरते हैं आज के बाज़ार में…औरऔर भी

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल में घट कर 13 महीनों के न्यूनतम स्तर 9.39% पर। सोना आयात 138% बढ़कर 750 करोड़ डॉलर। व्यापार घाटा जा पहुंचा 1778.74 करोड़ डॉलर पर। चकराया बाज़ार चिंता से। शेयर में 1230 की खरीद, लक्ष्य 1305 का, स्टॉप लॉस 1215 का। ज्यादा गिर गया तो लगा स्टॉप लॉस। पर घाटा रहा 1.22% पर सीमित। ट्रेडिंग में स्टॉप लॉस से कोई नहीं बचा। तो ज़ोर से दें ताली और देखें आगे…औरऔर भी

अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं। परपंरा है कि इस दिन सोना खरीदा जाता है तो तमाम ज्वैलरों ने इसे भुनाने के लिए लुभावनी पेशकश कर रखी है। यहां तक कि गोल्ड ईटीएफ में ट्रेडिंग के लिए बीएसई और एनएसई ने बाज़ार को 7 बजे तक खुला रखा है। 9.15 से लेकर 3.30 तक सामान्य ट्रेडिंग, फिर 4.30 से लेकर 7 बजे तक विशेष ट्रेडिंग। सोना खरीदना ही हो तो गोल्ड ईटीएफ खरीदें। अब देखते हैं आज का बाज़ार…औरऔर भी

हमने यहीं पर 16 नवंबर 2011 को एवरेस्ट इंडस्ट्रीज में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 138 रुपए पर था। इस साल 9 जनवरी तक 282.70 की चोटी पर पहुंचा और गिरने के बावजूद अब भी 37% ऊपर 189 पर है। 14 सितंबर 2010 को कावेरी सीड में निवेश को कहा, तब उसका शेयर 283.50 रुपए पर था। इस साल 16 जनवरी को 1491 तक जाने के बाद फिलहाल 1247 पर है। अब दूसरा पहलू…औरऔर भी

आज शनिवार को एनएसई और बीएसई में विशेष ट्रेडिंग सत्र होगा। 11 बजे से 12.45 बजे तक जिसमें शुरू में 15 मिनट का प्री-ओपन सत्र होगा। कैश और फ्यूचर व ऑप्शन (एफ एंड ओ) दोनों में ऑर्डर पेश किए जा सकते हैं। यह सूचना उन लोगों का दिल खुश कर देनेवाली है जिन्हें ट्रेडिंग का नशा लग चुका है। मैं इधर कुछ लोगों से मिला जो सुबह नौ बजे से लेकर शाम साढ़े तीन बजे बाज़ार बंदऔरऔर भी

चींटियों से चलने से घास भी नहीं हिलती, जबकि हाथी सूखी ज़मीन तक पर छाप छोड़ जाते हैं। लेकिन, चींटी खट से मुड़ जाती है, जबकि हाथी को वक्त लगता है। जो लोग घड़ी-घड़ी शेयरों की चाल देखकर रुख समझने का शगल पालते हैं, वे अक्सर गच्चा खाते हैं। शेयर बाज़ार में ‘हाथियों’ के ऑर्डर पांच-सात दिन लगाते ही हैं। इसलिए उनके रुख को पकड़ने का टाइमफ्रेम बड़ा होना चाहिए। वैसे, कल ढाई बजे क्या हमला हुआ!…औरऔर भी