क्या सितंबर में बाजार के धराशाई होने का हिन्डेनबर्ग अपशगुन सही साबित होगा या यह लेखक जो कह रहा है कि हमारा बाजार इस दौरान नई ऊंचाई पर पहुंच जाएगा? इसका फैसला तो सितंबर 2010 के अंत ही हो पाएगा। आज वो मौका नहीं है कि मैं बताऊं कि आपको क्या करना चाहिए। बस, थोड़ा इंतजार कीजिए। हकीकत आपके सामने होगी। अभी तो आप वाकई अवांछित बातों और विचारों को सुन-सुनकर डरे हुए होंगे। ऐसे में मेराऔरऔर भी

हमारी लगभग एक लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का 40 फीसदी हिस्सा खुदरा बिक्री से आता है। दूसरे शब्दों में जीडीपी में 40,000 करोड़ रुपए का योगदान हमारी रोजमर्रा की खरीद का है। इसका लगभग 94 फीसदी हिस्सा गली-मोहल्लों में फैली किराना दुकानों से आता है और केवल 6 फीसदी हिस्सा ही पैंटालून (बिग बाजार), रिलायंस रिटेल, स्पेंसर, आदित्य बिड़ला रिटेल और भारती के बड़े-बड़े स्टोरों से आता है। मतलब, आसपास की जिन दुकानों को हम दोऔरऔर भी

पिछले साल मई महीने में दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर वॉलमार्ट ने भारत में अपना पहला होलसेल कैश एंड कैरी स्टोर खोला था। अब साल भर बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रिटेलर केयरफोर भी यहां पहुंच गया है। अंतर इतना है कि वॉलमार्ट ने अपना व्यवसाय भारती मित्तल समूह के साथ मिलकर शुरू किया है तो केयरफोर अभी अकेले अपने दम पर अपने पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडयरी के तहत यह कारोबार शुरू कर रहा है। मूलतःऔरऔर भी

बाजार के ज्यादातर कारोबारी निफ्टी में शॉर्ट थे और टकटकी लगाए देख रहे थे कि कब स्क्रीन पर निफ्टी के लिए 5040 का अंक चमकता है। मेरी जिन भी 15-20 रिटेल प्रमुखों और दूसरे लोगों से बात हुई, सभी करेक्शन का इंतजार कर रहे थे। अभी हालत यह है कि या तो वे शॉर्ट हैं या 15 मार्च तक अग्रिम कर अदायगी के लिए बाजार से पैसे निकाल रहे हैं। कुछ तो यहां तक मानते हैं किऔरऔर भी