कुछ नहीं, बहुत-से लोग कहते हैं कि शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग साइंस के साथ-साथ आर्ट भी है। कला जो अंदर से आती है। लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं। ट्रेडिंग शुद्ध रूप से नंबरों का खेल है। किसी भाव पर लेनेवाले कितने हैं और बेचनेवाले कितने, इसी से तय होगा कि भाव आगे कहां जाएगा। चार्ट पर हमें चित्र-विचित्र आकृतियां नहीं, बल्कि खरीदने और बेचनेवालों का सही संतुलन दिखना चाहिए। शुरू करते हैं आज का अभ्यास…औरऔर भी

सफल ट्रेडर अपने प्रति निर्मम और बाज़ार के प्रति बेहद चौकन्ना रहता है। पक्का रिकॉर्ड रखिए। हर गलती से सीखिए और भविष्य में बेहतर कीजिए। यह नहीं कि धन गंवाने के बाद मुंह छिपाते फिरें। बहुत से लोग घाटा खाने के बाद परिचितों से ही नहीं, बाज़ार तक से कतराते हैं। लेकिन इस तरह छिपने-छिपाने से कुछ नहीं सुलझता। सफलता के लिए घाटे की पीड़ा को पिरोकर अनुशासन में बंधना पड़ता है। आगे है गुरुवार का चक्कर…औरऔर भी

कुछ लोग फाइनेंस को जमकर गरियाते हैं। कहते हैं कि यह तो बैठे-ठाले दूसरों की जेब ढीली करने का धंधा है, जबकि है यह उद्यमियों की प्रतिभा व मेहनत से हासिल कमाई में हिस्सेदारी का ज़रिया। शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग भी खुद को खोजने जैसी यात्रा है। जोखिम से नहीं डरते; कूदकर फलों को लपकने में मज़ा आता है; अध्ययन, अनुशासन व मेहनत का मन है तो कामयाब होंगे। कल की हिट टिप्स के बाद बात आजऔरऔर भी

बाजार पूंजीकरण के लिहाज से अब भी देश की सबसे बड़ी कंपनी है रिलायंस इंडस्ट्रीज। कोल इंडिया का बाजार पूंजीकरण 2,28,999 करोड़ रुपए है तो रिलायंस इंडस्ट्रीज का 2,39,516 करोड़ रुपए। लेकिन आंकड़ों की झूठी ललकार में भी रिलायंस का कोई तोड़ नहीं। शुक्रवार को 2011-12 के सालाना नतीजों की घोषणा करते हुए उसने कहा: 3,39,792 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड राजस्व, 19,724 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ और अब तक का सबसे ज्यादा 2,08,042 करोड़औरऔर भी

फिर वही हाल। लेकिन कल का उल्टा। दोपहर तक मामला सुस्त चल रहा था। फिर यूरोपीय बाजार से सकारात्मक रुझान मिला तो हमारा बाजार भी तेजी से बढ़ गया। लगातार चार दिन की बढ़त के बाद सेंसेक्स अब 17503.71 और निफ्टी 5332.40 पर है। सेंसेक्स आज 0.64 फीसदी तो निफ्टी 0.61 फीसदी बढ़ा है। अप्रैल के निफ्टी फ्यूचर्स का आखिरी भाव 5364 रहा है। 5370 से बस छह अंक पीछे। जानकार बताते हैं कि अगर बाजार कोऔरऔर भी

मौद्रिक नीति की घोषणा के फौरन बाद चौंककर सेंसेक्स और निफ्टी 1.3 फीसदी तक बढ़ गए। लेकिन धीरे-धीरे नीचे उतरने लगे। अंदेशा है कि अब बाकी बचे साल में शायद ब्याज दरों में और कटौती न की जाए। खुद रिजर्व बैंक गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव ने स्पष्ट किया, “मुद्रास्फीति के बढ़ने का रिस्क अब भी कायम है। कुछ ऐसी ही कारकों ने नीतिगत दरों में और कटौती की गुंजाइश सीमित कर दी है।” बस, यही सफाई शेयर बाजारऔरऔर भी

बीते शुक्रवार को इनफोसिस ने जो किया, वही इस शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा किए जाने का अंदेशा है। इनफोसिस को पहले लगी 12.6 फीसदी चोट के ऊपर करीब 1.5 फीसदी का फटका आज और लग गया। शेयर 25 अगस्त 2011 को हासिल 2169 रुपए के न्यूनतम स्तर से थोड़ा ही दूर, 2339.35 पर बंद हुआ। अब बाजार में चर्चा चल निकली है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज का लाभ चौथी तिमाही में उम्मीद से लगभग 7 फीसदी कमऔरऔर भी

15 मार्च 2012, चालू वित्त वर्ष 2011-12 की अंतिम तिमाही में एडवांस टैक्स की आखिरी किश्त देने की आखिरी तारीख। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) तो कई दिन बाद पूरे आंकड़े जारी करता है। लेकिन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से मिले शुरुआती संकेतों से पता चला है कि कॉरपोरेट क्षेत्र में ज्यादा टैक्स नहीं भरा है। जिन्होंने दिया है, उनमें बैंकिंग व बीमा कंपनियां सबसे आगे हैं। देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई)औरऔर भी

एक और दिन गुजर गया और बाजार के तमाम लोग जिस करेक्शन या गिरावट का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, वह आज भी नहीं हुआ। हमें उम्मीद थी कि निफ्टी 5610 तक जाएगा। लेकिन वह तो दोपहर 2.40 बजे के आसपास 5621.50 तक पहुंच गया और आखिर में 0.77 फीसदी की बढ़त के साथ 5607.15 पर बंद हुआ। निफ्टी फरवरी फ्यूचर्स 5634.70 तक जाने के बाद 5620.20 पर पहुंच गया। मैंने जैसा आपको पहले बताया था,औरऔर भी

अमेरिका में बेरोज़गारी की दर तीन सालों के न्यूनतम स्तर पर आ चुकी है। डाउ जोन्स मई 2008 के बाद के सर्वोच्च स्तर पर आ चुका है। वह शुक्रवार को 1.2 फीसदी की बढ़त लेकर 12,862.23 पर बंद हुआ है। लेकिन अब वहां करेक्शन आना लाजिमी है। देश में निफ्टी बड़े शान से 5300 का स्तर तोड़कर ऊपर आ चुका है। लगातार तीन दिन से 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए) से ऊपर टिका है। अरसे सेऔरऔर भी