सार्थक विचार
2011-02-13
गमले में पौधे और बोनसाई ही उगते हैं, पेड़ नहीं। इसी तरह विचार व्यवहार की आंधियों में पलते हैं, बंद कोटरों में नहीं। दुनिया के झंझावातों में निखरते हैं, इतिहास के थपेड़ों से संवरते हैं विचार।और भीऔर भी
गमले में पौधे और बोनसाई ही उगते हैं, पेड़ नहीं। इसी तरह विचार व्यवहार की आंधियों में पलते हैं, बंद कोटरों में नहीं। दुनिया के झंझावातों में निखरते हैं, इतिहास के थपेड़ों से संवरते हैं विचार।और भीऔर भी
जो चीज जैसी लगती है, वैसी होती नहीं। आंखों के रेटिना पर तस्वीर उल्टी बनती है, दिमाग उसे सीधा करता है। इसी तरह सच समझने के लिए बुद्धि की जरूरत पड़ती है जो अध्ययन, अभ्यास और अनुभव से ही आती है।और भीऔर भी
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