शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग में सफलता के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है अपने दिमाग को सही तरह से प्रशिक्षित करना। इसमें मन, बुद्धि व भावना तीनों आते हैं। बाज़ार में शोर बहुत है। सूचनाओं के अंबार में मन भटकता है, भावनाएं उबाल मारती हैं और बुद्धि भ्रमित हो जाती है। देश-विदेश की खबरें, सरकार की नीतियां व फैसले, कंपनियों के नतीजे और बाज़ार में हर पल बदलते भाव। क्या पकड़ें, क्या छोड़ें? अब पकड़ें मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

सड़क सभी की होती है। लेकिन गाड़ी, पेट्रोल और ड्राइविंग का संतुलन बनाकर चलें तो आप सलामत अपनी मंज़िल पर पहुंच जाते हैं। इसी तरह वित्तीय बाज़ार सभी का है। इसमें दिमाग, पूंजी और सिस्टम का संतुलन बनाकर चलें तो आप लक्षित मुनाफा कमा लेते हैं। इन तीनों चीज़ों में आप दूसरों से सीख व मदद हासिल कर सकते हैं। लेकिन फैसला और अमल पूरी तरह आपके हाथ में होता है। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बिना किसी सिस्टम व अनुशासन वाले ट्रेडरों को शुरू में सफलता मिलती है तो उनका जोश बढ़ जाता है। ब्रोकर भी उसकी पीठ थपथपाते हुए लिमिट बढ़ा देता है। ट्रेडर बड़ी पोजिशन में खेलने लगता है और ब्रोकर को ज्यादा सौदों पर ज्यादा कमीशन मिलता है। दोनों की मौज। लेकिन ट्रेडर जब हारना शुरू करता है तो ज्यादा सौदे करके बरबाद हो जाता है। मगर, ब्रोकर का कमीशन बढ़ता जाता है। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

अक्सर होता यह है कि लोग ब्रोकर के ऑफिस पहुंच जाते हैं। जो भी स्टॉक खबर या किसी वजह से भाग रहा होता है, उसे खरीद लेते हैं। फायदा हुआ तो उसी दिन शाम को सौदा काट देते हैं। अन्यथा, शुक्रवार को फायदा हो या नुकसान, उससे निकल जाते हैं। दरअसल, वे ब्रोकर की मार्जिन सुविधा का इस्तेमाल करते हैं जिसमें उन्हें पांच दिन का क्रेडिट मिलता है। यह तरीका बेहद खतरनाक है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के ट्रेडर को सफलता के लिए जिन पांच बुनियादी सवालों का जवाब खुद से पूछना चाहिए, वे हैं: आप खरीदने या बेचनेवाले स्टॉक्स का फैसला कैसे करते हैं; कैसे तय करते हैं कि कितना खरीदना या बेचना है; कैसे तय करते हैं कि कब खरीदना या बेचना है; घाटे में फंस गई पोजिशन से कब निकल जाना चाहिए; और अंतिम सवाल कि जीतनेवाली पोजिशन से कब निकल जाना चाहिए। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

नया साल शुरू और ब्रोकर से लेकर एनालिस्ट व शेयर बाज़ार के ‘ठग’ तक सभी लंबी फेंकने लगे। जबरदस्त कमाई का झांसा। कोई कहता है कि निफ्टी साल भर में 9400 तक पहुंच जाएगा तो कोई 9800 का स्तर बता रहा है। 15% से लेकर 20% कमाई की गारंटी। जीडीपी बढ़ेगा, एफआईआई आएंगे। चाहे कुछ हो जाए, बाज़ार पक्का चढ़ेगा। इसलिए चढ़ जा बेटा सूली पर, भला करेंगे राम। लेकिन आप फंसना नहीं। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

चार्ट पर समय के हर फ्रेम में आपको दिख जाएगा कि सामान्यतः किस भाव पर पहुंचते ही खरीद या बिक्री बढ़ जाती है। इंट्रा-डे ट्रेडर अमूमन 1-5 मिनट, 30 मिनट या घंटे का चार्ट देखते हैं। स्विंग, मोमेंटम या पोजिशनल ट्रेडर साप्ताहिक चार्ट में घुसने-निकलने का स्तर देखते हैं, दैनिक चार्ट से स्टॉप-लॉस की गणना करते हैं और 30 मिनट के चार्ट से एंट्री की माफिक रेंज तय करते हैं। चलिए अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

हम एक्स-रे कराने जाएं तो अस्पताल एक कोण से नहीं, कई कोण से एक्स-रे रिपोर्ट बनाता है ताकि डॉक्टर सही स्थिति को कायदे से समझ सके। इसी तरह जब हम किसी शेयर के स्वभाव व चाल को चार्ट पर समझना चाहते हैं तो उसे समय के एक फ्रेम में देखना पर्याप्त नहीं। स्विंग/मोमेंटम ट्रेडर तीन फ्रेम का इस्तेमाल तो करते ही हैं। ये हैं – 30 मिनट दो हफ्ते, दैनिक व साप्ताहिक चार्ट। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग करते हुए हम अतीत में पैठकर बाज़ार की दिशा तय करनेवाली शक्तियों की मनोदशा समझने की कोशिश करते हैं ताकि उनकी भावी चाल समझ सकें। एक पैर अतीत में, एक पैर भविष्य में। देखने-समझने को हमारे पास अतीत ही होता है। इस अतीत के तीन हिस्से हैं। एक अभी से 20 दिन, दूसरा 50 दिन से एक साल और तीसरा है कम से कम पांच साल का। शॉर्ट, मीडियम व लॉन्ग टर्म। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग व निवेश में मनचाहा परिणाम हासिल करना है तो हमें समय का बड़ा ध्यान रखता पड़ता है। मसलन, अगर हर तरफ निराशा छाई हो, नकारात्मक खबरों का ही बोलबाला हो तो उस समय हमारे या आप जैसे रिटेल ट्रेडर को छोटी अवधि की ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए और उन कंपनियों में पोजिशनल या लंबे समय का निवेश करना चाहिए, जिनके शेयर मजबूती के बावजूद गिरे पड़े हों। अब परखें मंगल की दृष्टि…औरऔर भी