वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का युद्ध है जिसमें आप अपनी चाल से दूसरों के बैंक खाते का धन अपने खाते में खींचते हो। दूसरे को कम समझना या अपने को उस्ताद समझना यहां घातक है। शांत मन, साफ बुद्धि व सटीक विश्लेषण आपके हथियार हैं। सिद्धांतः जो सूचनाएं सबको उपलब्ध हैं, वही आपको भी मिल सकती हैं। अंदर की सूचनाओं पर आधारित इनसाइडर ट्रेडिंग भी चलती है। लेकिन वो अपवाद है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

हम एक ही शेयर में बार-बार निवेश नहीं कर सकते। लेकिन एक ही शेयर में बार-बार ट्रेडिंग कर सकते हैं। वजह यह है कि निवेश में हम शेयर के भाव की दीर्घकालिक दिशा पर नज़र रखते हैं, उसकी लाइन को ध्यान में रखते हैं। लेकिन भाव असल में रेखा के रूप में नहीं, बल्कि लहरों के रूप में चलते हैं। उनकी इस अल्पकालिक लहरों के उतार-चढ़ाव को पकड़कर हम ट्रेडिंग में कमाते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बात साफ बड़ी साफ है कि वित्तीय बाज़ार में कमाई शुद्ध रूप से साफ समझ और अनुशासन का खेल है। हर सौदे का रिस्क व रिवॉर्ड का अनुपात समझा और मुनाफे को अधिकतम व घाटे को न्यूनतम रखने का अनुशासन माना तो दिल-दिमाग के साथ आपका बैंकखाता भी सुरक्षित रहेगा। लेकिन बुद्धि को छोड़ मन या इन्ट्यूशन पर चले तो कभी भी किनारा नहीं मिलेगा। आपको अपनी ट्रेडिंग पूंजी हमेशा बचाकर चलनी है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

महीनेभर में बीस दिन ट्रेडिंग की। सौदे वैसे चुने जिसमें गिरने की आशंका एक और बढ़ने की संभावना दो हो। रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात 1:2 का। मान लें कि बीस में से 60% यानी बारह सौदे गलत हों और आपने स्टॉप-लॉस 2% लगाया हो तो कुल नुकसान हुआ 12×2 यानी 24% का। लेकिन बाकी आठ सौदों में फायदा होगा 8×4 यानी 32% का। इस तरह बहुत खराब स्थिति में भी महीने भर में 8% कमाई। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में बड़ा रिस्क है। लेकिन ट्रेडिंग की सलाह देनेवालों के लिए यह बड़ा सुरक्षित पेशा है। आप इस बात को अच्छी तरह समझ लें। उन्होंने तो चैनल से लेकर वेबसाइट या अखबार में सलाह फेंकी, नोट पकड़े और किनारे हो लिए। लेकिन उस सलाह पर डूबने या उठनेवाली पूंजी आपकी है। बच्चे से भी परची उठवा लें तो प्रायिकता 50-50% रहेगी। नीति बनाइए कि 50-50% में भी लाभ कमाएंगे। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बंधे-बंधाए ढर्रे पर चलनेवाले भविष्य को लेकर निश्चिंत हो सकते हैं क्योंकि लगभग तय होता है कि आगे क्या होगा। मगर, लीक छोड़कर चलनेवाले हमेशा ऐसी धार पर खड़े होते हैं जहां पक्का पता नहीं होता कि कल क्या होगा। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग भी इसी तरह लीक से हटकर चलने का दुस्साहस है। यहां कुछ भी पक्का नहीं। इसलिए यहां हमेशा प्रायिकता की गणना करके चलें। सही तो क्या, गलत तो क्या? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

कुछ दिनों पहले एक दुर्जन का फोन आया। बोले कि उनकी रिसर्च फर्म कैश व फ्यूचर्स में इंट्रा-डे टिप्स देती है। रोज़ एक पक्की सलाह। मैंने पूछा कि स्टॉक सेलेक्शन का उनका सिस्टम क्या है। लगे आंय-बांय बकने। लेकिन दावा कि उनकी दस में से आठ टिप्स सटीक बैठती है। फीस 11,000 रुपए प्रति माह। ऐसे ठगों से सावधान रहें। कमाना है तो ऐसा सिस्टम बनाइए कि लोग आपके बाद खरीदें या बेचें। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

रिटेल ट्रेडरों को अगर बाज़ार से कमाना है तो उन्हें सच्चाई को जस का तस समझने की कोशिश करनी होगी और अपनी सीमाओं को स्वीकार करना होगा। मन का फंदा तोड़कर उसके ऊपर बुद्धि को मांजकर रखना होगा। कोई कितना भी झांसा दे, हमें कम मेहनत में ज्यादा कमाई के लालच में नहीं फंसना है क्योंकि हमें लालच में फंसानेवाले दरअसल अपनी आसान कमाई का इंतज़ाम करने में लगे होते हैं। अब चलाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

सीधी-सी बात है कि ग्लोबल नेटवर्क से जुड़ी पूंजी या उसके साथ लयताल मिलाकर चले रहे लोकल ऑपरेटरों के प्रोफेशनल अंदाज़ को टक्कर देना रिटेल ट्रेडरों के वश की बात नहीं है। रिटेल ट्रेडर उनका अनुसरण ही कर सकते हैं। लेकिन टुच्चे अहंकारवश रिटेल ट्रेडरों को यह सच्चाई हजम नहीं होती। नतीजा यह होता है कि उनकी सारी पूंजी धीरे-धीरे बहकर प्रोफेशनल व संस्थागत ट्रेडरों के बैंक खातों में पहुंच जाती है। अब परखें मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं कितनी ग्लोबल हुई हैं, इसका तो पता नहीं। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि दुनिया के वित्तीय बाज़ार एकदम ग्लोबल हो गए हैं। किसी भी अंतरराष्ट्रीय घटना से बड़े से लेकर छोटे बाज़ार तक एक साथ हिल जाते हैं। ग्लोबल नेटवर्क के साथ चलती पूंजी के सामने लोकल दिग्गज़ बौने साबित हो जाते हैं। ऐसे में वित्तीय बाजार की समझ और अपना हुनर ही अंततः काम आता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी