जो लोग ममता बनर्जी के तीखे तेवरों के बाद यूपीए सरकार के अस्थिर होने की बात कर रहे थे, उनके लिए बुरी खबर है कि माया और मुलायम दोनों मजबूती से सरकार के साथ डट गए हैं। मंगलवार को सरकार को उस समय राहत मिली, जब समाजवादी पार्टी और बीएसपी के समर्थन से एनसीटीसी सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के संशोधनों को खारिज कर दिया गया। तृणमूल कांग्रेस मतदान में अनुपस्थित रही। सपा व बीएसपी केऔरऔर भी

मैंने कहा था कि ब्याज दर में कटौती नहीं होगी और कटौती वाकई नहीं हुई। असल में रेपो दर में 0.25 फीसदी और एसएलआर में एक फीसदी कमी की बात जानबूझकर फैलाई जा रही थी। एक विदेशी मीडिया तक ने ऐसी खबर चलाई थी। ब्याज नहीं घटी तो बाजार में स्वाभाविक रूप से निराशा छा गई। और, तब बाजार को गिरना ही था। निफ्टी आखिरकार 1.53 फीसदी की गिरावट के साथ 5380.50 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टीऔरऔर भी

वादों की हकीकत को पहचानता है बाजार। इसीलिए भारतीय रेल के कामकाज से जुड़े तमाम स्टॉक कल, रेल बजट में की गई ठीकठाक घोषणाओं के बावजूद लुढकते चले गए। इसका अपवाद था तो इकलौता बीईएमएल जिसका नाम पहले भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड हुआ करता था। वैसे भी, बीईएमएल का वास्ता रेल मंत्रालय से नहीं, रक्षा मंत्रालय से है। वह रेलवे को माल सप्लाई जरूर करती है। लेकिन ज्यादा नहीं। इसलिए बीईएमएल के शेयर अगर मामूली बढ़त लेकरऔरऔर भी

जिस पश्चिग बंगाल में ममता बनर्जी मां, माटी, मानुष के नारे पर सत्तासीन हुई हैं, उसी के एक इलाके की माटी हजारों मानुषों के लिए श्राप बन गई है। सुंदरवन के गोसाबा में हजारों किसानों के लिए आने वाला मानसून बारिश की बूंदें भले ही ले आए, लेकिन खारी धरती की फसलें तब भी हरी नहीं होंगी। दो साल पहले आए आइला चक्रवात से खारी हुई मिट्टी का अभिशाप झेलने को विवश हैं ये किसान। एक ओरऔरऔर भी

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने 34 सालों से चले आ रहे लेफ्ट के किले को ढहा दिया। जयललिता ने एम करुणानिधि को सत्ता से बाहर कर दिया। ममता ने 294 में से 226 सीटें जीत लीं तो जयललिता ने 234 सदस्यों की विधानसभा में 204 सीटों पर कब्जा कर लिया। एक जगह तीन-चौथाई से ज्यादा तो एक जगह से चार बटे पांच से भी ज्यादा का बहुमत। विश्लेषक बता रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में लेफ्टऔरऔर भी

रेल मंत्री ममता बनर्जी ने इस साल के रेल बजट में ऐसी कोई नीतिगत घोषणा नहीं की थी। लेकिन भारतीय रेल अब रिटायरिंग रूम्स या प्रतीक्षालय का प्रबंध निजी हाथों में सौंपने जा रही है। इसकी शुरुआती राजधानी दिल्ली से की जा रही है। कहा जा रहा है कि इससे रेलवे स्टेशनों के प्रतीक्षालयों में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उत्तर रेलवे की योजना के अनुसार इस प्रकार के प्रतीक्षालयों में टीवी सेट और रूम सर्विसऔरऔर भी

भारतीय रेल ने नए वित्त वर्ष 2011-12 में 57,630 करोड़ रुपए खर्च करने का निर्णय लिया है। यह किसी एक साल में रेलवे का अब तक का सबसे बड़ा आयोजना खर्च है। इस खर्च में से 20,000 करोड़ रुपए वित्त मंत्रालय से बजटीय सहयोग के रूप में मिलेंगे। भारतीय रेल अपने आंतरिक स्रोतों से 14,219 करोड़ रुपए लगाएगी। डीजल पर सेस या अधिभार से 1041 करोड़ रुपए मिलेंगे। निजी क्षेत्र की भागीदारी वाली पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप)औरऔर भी

रेल मंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को गलत बताया कि उनका रेल बजट लोकलुभावन या पश्चिम बंगाल केन्द्रित है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस बजट में पूरे देश का ध्यान रखा है और हर क्षेत्र के लिए परियोजनाएं दी हैं। लोकसभा में वित्त वर्ष 2011-2012 का रेल बजट पेश करने के बाद संसद भवन में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए ममता ने सीपीएम के उस आरोप को भी गलत बताया कि उन्होंने रेलवे को कंगाल बनाऔरऔर भी

पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने रेल बजट को ‘कोरी घोषणाओं का पुलिंदा’ करार देते हुए कहा कि इस बजट के जरिये पश्चिम बंगाल में अपनी चुनावी रेल दौड़ाने की कोशिश कर रही मौजूदा रेल मंत्री ममता बनर्जी ने मंत्रालय को अर्श से फर्श पर ला दिया है। आरजेडी की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अशोक सिंह ने ममता द्वारा पेश बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि रेलमंत्री काऔरऔर भी

यूं तो ममता बनर्जी का रेल बजट सिर्फ राजनीति का झुनझुना भर है। 85 पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) परियोजनाओं की घोषणा भी बहुत बढ़ी-चढ़ी लगती है। लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि भारतीय रेल निजीकरण की दिशा में बढ़ रही है। आज ही आई आर्थिक समीक्षा ने आम बजट को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। राजकोषीय घाटे को जीपीजी के 4.8 फीसदी पर लाना दिखाता है कि सरकार अपने खजाने को चाक-चौबंद करने के प्रतिऔरऔर भी