जब कोई घटना घट जाती है तो उसकी अनंत व्याख्याएं की जा सकती हैं। अपने-अपने हिसाब से तथ्य चुनो और बताते जाओ कि ऐसा इसलिए और वैसा उसलिए हुआ। लेकिन शेयरों के रोजमर्रा के भावों में धांधली जमकर होती है। इसे कोई भी नकार नहीं सकता। सूचकांकों पर नज़र रखिए। आप पाएंगे कि अक्सर ढाई बजे के बाद खटाक से बाज़ार की दिशा पलट दी जाती है। कल भी ऐसा ही हुआ। आखिर क्या थी इसकी वजह…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेश और ट्रेडिंग में ज़मीन-आसमान का फर्क है। धैर्य व शांत चित्त दोनों में ज़रूरी है। लेकिन दोनों का टाइमफ्रेम भिन्न है। लंबे समय में कोई भी शांत और धैर्यवान हो सकता है। पर घंटे-दो घंटे या हफ्ते-दस दिन में भावनाओं के दबाव में आए बगैर ट्रेडिंग में ज्यादा कमाई और कम नुकसान के अवसर पकड़ना आसान नहीं। हंस मछली पकड़ लेता है, पर कौआ कांव-कांव करता रह जाता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

सुरक्षित चलने वाला कभी बहुत ज्यादा नहीं कमाता। पर जितना कमाता है, बराबर कमाता है। वहीं जो खूब रिस्क लेता है वो कभी-कभी तो बहुत कमा लेता है। पर उसके हाथ में कटोरा आते भी देर नहीं लगती। कछुए व खरगोश की पुरानी कथा। अगर आपको ट्रेडिंग से बराबर कमाना है तो कम से कम रिस्क में ज्यादा से ज्यादा रिटर्न का सिस्टम बनाकर दृढ़ता से उसका पालन करना होगा। अब बुधवार के वार पर एक नज़र…औरऔर भी

इस दुनिया में कुछ भी अकारण नहीं, खासकर शेयर बाज़ार में तो कतई नहीं। सहज मानव स्वभाव के चलते हम जो होता है, उसकी वजह तलाशने में जुट जाते हैं। लेकिन सहजता ध्यान में चलती है, धंधे में नहीं। धंधे का वसूल है कुछ चीज़ों को नज़रअंदाज़ कर कुछ पर फोकस करना। कामयाब ट्रेडर को इससे मतलब नहीं कि शेयर इधर-उधर क्यों भागा। उसका फोकस है कि इस चाल से कमाया कैसे जाए। अब मंगलवार की चाल…औरऔर भी

बाज़ार में सन्निपात-सा छा गया है। भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति भले ही अच्छी न हो। लेकिन मात्र चालू खाता घाटा (सीएडी) घटने के आंकड़े ने बाज़ार को उठाने का बहाना दे दिया। मोदी के आने का हल्ला मचाकर गुब्बारे को फुलाया जा रहा है। लेकिन शेयर बाज़ार की हर हरकत के पीछे मंशा मुनाफा कमाने की होती है। बाज़ी हमेशा बड़े ट्रेडरों के हाथ में होती है। हम फंसे नहीं, इस सावधानी के साथ बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

हम अक्सर जानकर नहीं, मानकर चलते हैं। जो जैसा है, उसे उस रूप नहीं, बल्कि जिस रूप में हम देखना चाहते हैं, वैसा देखते हैं। लग जाए, ऐसा होगा तो मान बैठते हैं कि वैसा ही होगा। ट्रेडिंग कोई आत्मपरक नहीं, बड़ी वस्तुपरक गतिविधि है। मन की पूर्वधारणा हमें सच नहीं देखने देती। नतीज़तन लड़ने से पहले ही हम हार जाते हैं। मनैव मनुष्यानाम् कारण बंधन मोक्षयो। गीता की यह सूक्ति ध्यान में रखकर बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

क्यूपिड का मतलब है प्रेम का देवता, कामदेव। इसी के नाम पर 1985 में बनी क्यूपिड ट्रेड्स एंड फाइनेंस। मुंबई के पंचरत्न ओपरा हाउस में दफ्तर है। केतनभाई सोराठिया इसके कर्ताधर्ता हैं। कल सुबह एसएमएस आया कि क्यूपिड ट्रेड्स को 145 पर खरीदें, महीने भर में 460 तक जाएगा। अरे भाई, कैसे? सालों से कंपनी का धंधा तो निल बटे सन्नाटा है! सावधान रहें ऐसे प्रेम-पत्रों से। झांसे में कतई न आएं। अब देखें गुरुवार का बाज़ार…औरऔर भी

दुनिया पहले से सोचे ढर्रे पर चलती रहे तो जीवन का सारा थ्रिल खत्म हो जाए। अनिश्चितता के पहलू को कभी नज़रअंदाज़ करके नहीं चला जा सकता। कल भी यही हुआ। सब माने बैठे थे कि रूस यूक्रेन पर हमला करने ही वाला है। लेकिन ऐनवक्त पर पुतिन ने रूसी सेनाओं को वापस बुलाने का आदेश दे दिया। भारत समेत दुनिया भर के बाज़ार इस अप्रत्याशित कदम से चहचहाने लगे। अब देखें बुधवार की दस्तक क्या है…औरऔर भी

दुनिया तो गोल थी ही। बाज़ार भी अब ग्लोबल हो चला है। पुतिन द्वारा युद्ध की घोषणा से यूक्रेन में लामबंदी। चीन में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर का उत्पादन घटकर आठ माह के न्यूनतम स्तर पर। ऐसे तमाम घटनाक्रम भारतीय शेयर बाज़ार के लिए उतनी ही अहमियत रखते हैं जितनी दिसंबर तिमाही में आर्थिक विकास दर का घटकर 4.7% पर आ जाना। कोई कितनी खबरों के पीछे भागे! इसलिए भाव देखो, भावों का चार्ट देखो। अब वार मंगल का…औरऔर भी

बड़े निवेशकों की चाल क्या, कब और कैसे होती है, इसका एक नमूना पेश किया शुक्रवार को राकेश झुनझुनवाला ने। उन्होंने एचटी मीडिया के 15 लाख शेयर 71.25 रुपए के भाव पर खरीद लिए। 10.69 करोड़ रुपए का यह सौदा बल्क डील के माध्यम से हुआ। जाहिर है कि इतनी बड़ी एकमुश्त रकम हमारे-आपके पास नहीं हो सकती। लेकिन भाव का यह वो स्तर था, जहां पहले संस्थागत खरीद हो चुकी थी। अब नए महीने का आगाज़…औरऔर भी