हर बिजनेस की तरह ट्रेडिंग में पूंजी लगती है। कितनी? यह रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर है। डेरिवेटिव सेगमेंट में एक लॉट 5 लाख रुपए का है तो उसके लिए पांच लाख रुपए से कम नहीं। वहीं, कैश सेगमेंट में ट्रेडिंग के लिए न्यूनतम एक लाख रुपए होने चाहिए। नियमतः शेयर बाज़ार के लिए रखे धन का 5% ही ट्रेडिंग में लगाना चाहिए। यानी, 20 लाख रुपए अतिरिक्त हों, तभी ट्रेडिंग करें। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

जिस तरह बिना लागत लगाए कोई बिजनेस नहीं हो सकता, उसी तरह वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में स्टॉप-लॉस या घाटे से नहीं बचा जा सकता। आप कितनी भी अच्छी ट्रेडिंग रणनीति बना लें, महंगी से महंगी सेवा ले लें, उसमें चूक का होना लाजिमी है। इसलिए रणनीति को बराबर मांजते रहना पड़ता है और उस पर अनुशासन में बंधकर अमल करना होता है। यहां मन की नहीं, बुद्धि की सुननी पड़ती है। अब पकड़ें गुरुवार की दशादिशा…औरऔर भी

नया संवत मांग करता है कि हम कुछ मूलभूत सबक दोहरा लें। सबसे पहली बात याद रखें कि वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का बिजनेस है। हर बिजनेस की तरह ही इसमें मेहनत, बुद्धि व समय के साथ आमदनी व लागत का पूरा हिसाब-किताब रखना पड़ता है। जो ट्रेड सही पड़ते हैं, उनसे मिला लाभ इस धंधे की आमदनी है। वहीं, जो सौदे उलटे पड़ते हैं, उनमें लगा स्टॉप-लॉस इसकी लागत है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

भारत देश या उपमहाद्वीप नहीं, दरअसल पूरा द्वीप है। इसमें साल तक बदल जाते हैं। उत्तर में विक्रम नव वर्ष संवत 2073 वित्त वर्ष के एक हफ्ते बाद 8 अप्रैल को शुरू हो चुका है। वहीं, पश्चिम में गुजराती नव वर्ष संवत 2073 दिवाली के एक दिन बाद 31 अक्टूबर से शुरू हुआ है। चूंकि शेयर बाज़ार में गुजरातियों की बहुतायत है, इसलिए आज नए संवत की ट्रेडिंग का पहला दिन है। मंगलवार से कीजिए शुभ शुरुआत…औरऔर भी

हर मुश्किल अपने साथ उसका समाधान भी लेकर आती है। वित्तीय जगत में हर तरफ शिकारी हैं तो आम ट्रेडर व निवेशक के पास आज उससे बचाव और अपनी धार बनाने का सारा सरंजाम भी है। जो सूचनाएं बड़े बैंकों, बीमा कंपनियों, एचएनआई या विदेशी व हेज फंडों के पास हैं, वे आज हमें भी उपलब्ध हैं। उनके तार जोड़कर जानकार बन जाएं तो हम भी सबसे अच्छे ट्रेडिंग आइडिया निकाल सकते हैं। अब दिवाली-पूर्व का अभ्यास…औरऔर भी

हमारे वित्तीय उद्योग के साथ बड़ी समस्या ये है कि यहां अंदर के बहुतेरे लोग निवेशकों की मदद नहीं, शिकार करने की ताक में लगे रहते हैं। ब्रोकर बहुत सारी सलाहें निकालते रहते हैं ताकि हम-आप जमकर सौदे करें और उनका कमीशन बढ़ता रहे। टीवी चैनल और वहां आनेवाले एनालिस्ट अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। बिजनेस अखबारों के लिए भी धंधा पहले है, पाठक बाद में। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

ठीक पिछली उठान पर संस्थाओं की खरीद आ सकती है और पिछली गिरावट पर संस्थाएं बिकवाली कर सकती हैं। लेकिन ध्यान रहे कि वित्तीय बाज़ार में कुछ भी 100% पक्का नहीं। यहां प्रायिकता चलती है। हो सकता है और नहीं भी। इसलिए ट्रेडर को हमेशा रिस्क मैनेज करके चलना पड़ता है। दिक्कत है कि वित्तीय जगत में घाघ भरे पड़े हैं। इसमें ट्रेडिंग की अपनी धार हर किसी को खुद निकालनी पड़ती है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

आखिरी भाव से पिछली उठान या गिरावट को आप स्टॉक के साप्ताहिक चार्ट पर भी लोकेट कर सकते हैं। डेली और साप्ताहिक चार्ट में भाव का यही वो स्तर है, जहां पर संस्थागत निवेशकों की खरीद/बिक्री आ सकती है। इसके साथ आरएसआई जैसे संकेतकों और भावों के मूविंग औसत की रेखाओं का भी मिलान करना होता है। इन सबसे जो स्तर निकलता है, वो काफी सटीकता से संस्थाओं की चाल बता देता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

कैसे पता लगाया जाए कि बड़े संस्थागत निवेशक बाज़ार में कहां खरीद-बेच रहे हैं। बहुतेरे लोग कहेंगे कि यह पता लगाना दूर-दूर संभव नहीं। फिर, बड़े-बड़े नाम लेकर लोग उल्लू ही बनाते हैं। हम कहते हैं कि आपको कहीं और जाने की ज़रूरत नहीं है। बीएसई या एनएसई पर स्टॉक का डेली/वीकली चार्ट खोलिए। आखिरी भाव से बाईं तरफ चलते जाइए। जहां से पिछली बार भाव चढ़े या गिरे थे, वहीं रुक जाएं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

संस्थागत निवेशक वहीं खरीद या बिक्री करते हैं, जहां सप्लाई व डिमांड में असंतुलन होता है तो उनकी चाल जानने के लिए हमारा फोकस इस असंतुलन का पता लगाने पर होना चाहिए। इसके लिए किसी उस्ताद या एनालिस्ट की शरण में जाने की ज़रूरत नहीं। इसका रहस्य बाज़ार या स्टॉक के भावों का चार्ट ही खोल देता है। बस उसे कायदे से देखना और भावों के पीछे की भावना को समझना आना चाहिए। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी