बाज़ार की सांस इधर बहुत तेजी से उठ-गिर रही है। निफ्टी प्रतिदिन औसतन 120 से 160 अंक ऊपर-नीचे होता है। सीमित खरीद में बाज़ार चढ़ता है तो भारी वोल्यूम के साथ गिर जाता है। इस समय हालत यह है कि गिरते वक्त केवल कैश सेगमेंट में ही वोल्यूम नहीं बढ़ता, डेरिवेटिव सेगमेंट में ओपन इंटरेस्ट भी बढ़ जाता है। मतलब, शॉर्ट सेलिंग करनेवाले बाज़ार गिरने की उम्मीद में सौदे बढ़ाते जा रहे हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

विदेशी निवेशक बाहर से सस्ते उधार का धन ला रहे हैं। देशी संस्थाएं आम लोगों से सस्ते में मिला धन लगा रही हैं। अपने बाज़ार में उधारी का एक अलग खेल डेरिवेटिव सौदों के रूप में चलता है जिन्हें लीवरेज्ड सौदे भी कहते हैं। एक रुपए लगाकर पांच से बीस गुना ज्यादा रकम का सौदा। कैश ही नहीं, फ्यूचर्स सेगमेंट में भी मार्जिन का जबरदस्त खेल। भाव बढ़े तो मार्क-टू-मार्केट की लटकी तलवार। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

सीधी-सी बात है कि किसी शेयर/स्टॉक के भाव और शेयर बाज़ार के सूचकांक तभी बढ़ते हैं जब उन्हें खरीदनेवाले ज्यादा ही आतुर हों। लेकिन सवाल उठता है कि जब सारी दुनिया में कोरोना का कहर बरपा हो और अर्थव्यस्था में धन भयंकर की तंगी हो, तब शेयरों को खरीदने इतना तगड़ा धन आ कहां से रहा है?  यह धन है अमेरिका, जापान और यूरोप से बेहद कम ब्याज पर लिए गए उधार का। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

आज़ाद भारत के इतिहास में अर्थव्यवस्था कभी भी इतनी भयंकर गिरी नहीं थी। बेरोजगारी 40 साल के चरम पर। फैक्ट्रियों में पूरा उत्पादन शुरू नहीं हुआ। बैंकों के गले में एनपीए का फंदा ज्यादा कस गया। आईएमएफ ने इस साल जीडीपी के 10.3% और रिजर्व बैंक ने 9.5% घटने का अनुमान लगाया है। फिर भी सेंसेक्स दोबारा 40,000 तक जा पहुंचा है। आखिर शेयर बाज़ार में छाए इस उन्माद की वजह क्या है? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

पंद्रह-बीस साल पहले शेयर बाज़ार के ट्रेडर को बहुत सारी गणनाएं खुद करनी पड़ती थी। अब तो स्टॉक एक्सचेंज का सॉफ्टवेयर ही तमाम ज़रूरी गणनाएं व चार्ट बना कर दे देता है। इंट्रा-डे से लेकर स्विंग व मोमेंटम ट्रेड उन्हीं 140 स्टॉक्स में करना चाहिए जिनमें डेरिवेटिव ट्रेडिंग भी होती है। इनमें से सबसे अधिक चंचल, बढ़त, वोल्यूम, ओपन इंटरेस्ट व सबसे ज्यादा मार्केट वायड पोजिशन लिमिट बढ़ने वाले स्टॉक मुफीद होते हैं। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार पैटर्न और संख्याओं की जिस भाषा में आपसे बात कर रहा है, उसे समझते हैं तो आप दूसरे ट्रेडरों पर हमेशा बीस पड़ेंगे। उन्नीस पर बीस पड़ना ही ट्रेडिंग में आपको जीत दिलाता है। देशी-विदेशी संस्थाएं भारी धन का खेल खेलती हैं और उसके दम पर बाज़ार की दशा-दिशा तय करती है। लेकिन उनका हर सौदा भावों के उतार-चढ़ाव में झलक जाता है जिसे आप थोडी-सी समझ से पकड़ सकते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

रेत पर पड़े कदमों की तरह शेयर बाज़ार का हर सौदा अपने डिजिटल निशान हर तरफ छोड़ जाता है। ट्रेडिंग स्क्रीन पर भाव बदलते रहते हैं। एक्सचेंज भावों के पैटर्न को हर तरीके से समझने की कुजी पेश करता है। बदलते पैटर्न और संख्याओं की भाषा में बाज़ार बराबर आपको संदेश देता रहता है। यह भाषा जानकर बाज़ार के संकेत समझ लें तो वह आपकी मुठ्ठी में होगा। किसी टिप्स/सलाह की ज़रूरत नहीं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

मंत्र या टिप्स के चक्कर में पड़े लोग खुद मेहनत नहीं करना चाहते। आंख, कान व बुद्धि का इस्तेमाल नहीं करना चाहते। अन्यथा, आज तो हमारा सारा बाज़ार डिटिजल हो चुका है। एकदम पारदर्शी। जो हो रहा है, सब आंखों के सामने। बल्क व ब्लॉक-डील से लेकर देशी व विदेशी संस्थाओं तक की खरीद-फिरोख्त का सारा डेटा अगले दिन की ट्रेडिंग से पहले आपकी स्क्रीन पर होता है, बस दो-चार क्लिक के बाद। अब मंगलवार की दृष्टि..औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग उन्हीं लोगों को करनी चाहिए, जिनके पास अपनी सारी तात्कालिक और आकस्मिक ज़रूरतों का इंतज़ाम कर लेने के बाद भी इफरात धन बचता है। लेकिन यहां केवल वही लोग नहीं जाते जिनके पास इफरात धन है, बल्कि ज्यादातर ऐसे लोग आते हैं जो अपने सीमित धन को इफरात बनाना चाहते हैं। वे हमेशा किसी मंत्र या टिप्स के चक्कर में पड़े रहते हैं जो उन्हें रातोंरात धनवान बना दे। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

छह साल से मोदी सरकार का एक सूत्रीय कार्यक्रम रहा है ज्यादा से ज्यादा टैक्स जुटाना। नोटबंदी से लेकर बिना तैयारी के जीएसटी लागू करने के पीछे मूल मकसद यही रहा है। घोटाले और बैंक फ्रॉड रुक जाएं, यह उसकी प्राथमिकता नहीं है। लेकिन मध्यवर्ग व व्यापारी तबके से वह टैक्स वसूलने का कोई मौका नहीं चूकती। कोरोना संकटकाल में भी प्रीमियम से लेकर डीमैट खातों तक पर उसकी वक्री-दृष्टि लगी हुई है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी