समझना होगा कि मसला शेयर बाज़ार का नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की ताकत का है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भले ही ठहराव हो, बावजूद इसके वह दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत इतने विशाल प्राकृतिक व मानव संसाधनों के बावजूद विश्व में छठे नंबर की अर्थव्यवस्था है। प्रति व्यक्ति जीडीपी की बात करें तो भारत दुनिया में 148वें नंबर पर है। इसलिए भारतीय और अमेरिकी शेयर बाज़ार के पी/ई का समान होना हास्यास्पद है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

भारतीय शेयर बाज़ार इस वक्त बेहद नाज़ुक दौर से गुज़र रहा है। सस्ते विदेशी धन के आगम ने निफ्टी-50 को पहली बार 40 के पी/ई अनुपात के पार पहुंचा दिया। मतलब, कंपनियों का प्रति शेयर मुनाफा दबा हुआ है, जबकि उनके शेयरों के भाव चढे जा रहे हैं। न इतनी विरोधाभासी स्थिति जापान में है, न ही ब्रिटेन व अन्य यूरोपीय देशों में। केवल अमेरिका जैसी ठहरी अर्थव्यवस्था से भारत की टक्कर है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

इस वक्त भारत ही नही, अमेरिकी शेयर बाज़ार में भी आग लगी हुई है। निफ्टी-50 का पी/ई अनुपात कल 40.03 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिका का डाउ जोन्स सूचकांक इस वक्त 30.82 और S&P-500 सूचकांक 41.17 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। हालांकि फर्क यह है कि अमेरिकी बाज़ार में जहां निवेशकों को 1.94% लाभांश यील्ड मिल रही है, वहीं भारत में लाभांश यील्ड इससे कम 1.09% है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

विदेशी पोर्टफोलियो/संस्थागत निवेशकों (एफपीआई/एफआईआई) का खेल एकदम सीधा-सरल है। वे अपने देश से नगण्य ब्याज पर धन उठाकर भारतीय बाज़ार में लगाते हैं। इस पर उन्हें 5-6% रिटर्न भी मिल जाए तो ब्याज और जोखिम की भरपाई करने के बाद इतना सुरक्षित मुनाफा कमा लेते हैं जो उन्हें विकसित देशों में कभी नहीं मिल सकता। लेकिन अपनी अंतहीन लालच में उन्होंने भारतीय शेयर बाज़ार को भारतीयों की ही पहुंच से बाहर पहुंचा दिया। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

मौजूदा ग्लोबल-दौर में आम भारतीयों के बीच विदेशी वस्तुओं का क्रेज़ खत्म हो गया क्योंकि उनको दुनिया की लेटेस्ट चीजें देश में ही मिल जाती हैं। लेकिन हमारी सरकार में विदेशी पूंजी का भयंकर क्रेज़ है। रिकॉर्ड विदेशी निवेश का ढिंढोरा बराबर पीटती है। पोर्टफोलियो निवेशकों के गंजेड़ी स्वभाव (गंजेड़ी यार किसके, दम लगाके खिसके) पर सवाल उठे तो नियम बना दिया कि कंपनी में 10% से कम तो एफपीआई, ज्यादा तो एफडीआई। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

प्रत्यक्ष विदेशी निवेशक भारत के उद्योग-धंधों या व्यापार मे निवेश करते हैं। इस तरह देश में रोज़गार के थोड़े-बहुत अवसर पैदा करते हैं। उनकी कमाई का थोड़ा हिस्सा भारतीयों को भी मिलता है। लेकिन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई/एफआईआई) का मकसद बाहर से डॉलर, यूरो या येन जैसी विदेशी मुद्रा लाकर भारत के ऋण या शेयर बाज़ार से विशुद्ध कमाई करना होता है। उनके भारतीय ऑफिस में मुठ्ठीभर कर्मचारी होते हैं, जबकि कमाई जबरदस्त। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाज़ार में साल 2020 में शुद्ध रूप से 1,70,260.39 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड निवेश किया। साल 2019 में उन्होंने 1,01,120.77 करोड़ रुपए, 2017 में 51,252.92 करोड़ रुपए, 2016 में 20,566.18 करोड़ रुपए, 2015 में 17,805.96 करोड़ रुपए और 2014 में 97,055.55 करोड़ रुपए डाले थे। वहीं, साल 2018 में यहां से 33,013.05 करोड़ रुपए निकाले थे। छह साल में 4,25,048.72 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश। आखिर क्यों? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

ट्रेडर को हमेशा जानते रहने के पीछे पड़ा रहना चाहिए। हवाई नहीं, काम का व्यावहारिक ज्ञान। यह ज्ञान साथ के भरोसेमंद ट्रेडरों से मिल सकता है। इंटरनेट पर देश-विदेश की जानकारियां सहज उपलब्ध हैं। सफल ट्रेडरों का अनुभव भी पढ़कर जान सकते हैं। लेकिन ऐसा करते वक्त हमेशा कागजी शेरों को अलग से पहचानना होगा, उनकी हवा-हवाई कहानियों से बचना होगा। सबसे अहम है बाज़ार में उपलब्ध डेटा में गोता लगाने का हुनर। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

आपको शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से प्रतिमाह कम से कम एक लाख रुपए कमाने हैं। अमूमन बीस दिन की ट्रेडिंग का मतलब, औसतन 5000 रुपए प्रतिदिन। हर दिन एक जैसा नहीं होता तो किसी दिन ज्यादा भी कमाना पड़ेगा। किसी भी स्तर की ट्रेनिंग, किसी गुरु की कृपा या किस्मत से यह नहीं मिलेगा। यह आपके सिस्टम, अनुशासन व सजगता से मिलेगा। द्रोणाचार्य बहाना हैं। एकलव्य को खुद अभ्यास से पारंगत बनना होगा। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयर बाज़ार और ट्रेडिंग को 100% देने का क्या व्यावहारिक मतलब है? यही कि शेयर बाज़ार के चेहरे, चाल व चरित्र को अच्छी तरह समझते रहना। जीवन का यह मंत्र अपने मन में गहरे पैठा लें कि कुछ भी अकारण नहीं होता। जो हुआ, उसका कोई न कोई कारण ज़रूर होता है। शेयर के भाव बढ़े या गिरे तो उसका कोई न कोई कारण ज़रूर रहा होगा। तहकीकात से सही कारण तलाशते/जानते रहें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी