सही ज्ञान, विज्ञान और दर्शन के बिना हम इस दुनिया में आंखें रहते हुए भी अंधों की तरह विचरते हैं। अंदाज सही लग गया तो तीर, नहीं तो तुक्का। चोट सिर में लगती है और मरहम घुटनों में लगाते हैं।और भीऔर भी

ज्ञान आनंद की पहली कड़ी है। ज्ञान की आंधी के बिना भ्रम नहीं टूटता, माया का जाल नहीं छंटता। जाल नहीं छंटता तो कुंडलिनी नहीं जगती, सहस्रार कमल नहीं खिलता, हम आनंद विभोर नहीं होते।और भीऔर भी

हमारे अंदर-बाहर हर वक्त जड़ता व गतिशीलता के बीच संघर्ष चलता रहता है। लड़कर खड़े नहीं हुए तो जड़ता खींचकर बैठा देती है। भ्रम और पूर्वाग्रह जड़ता के सहचर हैं, जबकि ज्ञान-विज्ञान गतिशीलता के।और भीऔर भी

।।मनमोहन सिंह।। संस्‍कृत भारत की आत्‍मा है। संस्‍कृत विश्‍व की प्राचीनतम जीवित भाषाओं में से एक है। लेकिन प्रायः इसके बारे में गलत धारणा है कि यह केवल धार्मिक श्‍लोकों और अनुष्ठानों की ही भाषा है। इस प्रकार की भ्रांति न केवल इस भाषा की महत्‍ता के प्रति अन्‍याय है, बल्कि इस बात का भी प्रमाण है कि हम कौटिल्य, चरक, सुश्रुत, आर्यभट्ट, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्‍त व भास्‍कराचार्य जैसे अनेक लेखकों, विचारकों, ऋषि-मुनियों और वैज्ञानिकों के कार्य केऔरऔर भी

ज्ञान ऐसा मनोरंजन है जो हमारे अंदर उन अनुभूतियों के रंध्र खोल देता है जो पहले हमारी पहुंच में थीं ही नही। आम मनोरंजन हमें निचोड़ डालता है, जबकि ज्ञान हमारी संवेदनाओं को उन्नत बनाता है।और भीऔर भी

ऑपरेटरों द्वारा संचालित स्टॉक्स की धुनाई का एक और दौर बाजार में साफ-साफ देखा जा सकता है। केएसके एनर्जी वेंचर्स और गति लिमिटेड इसी का शिकार बन गए लगते हैं। केएसके को 8.22 फीसदी तोड़कर 64.20 रुपए की नई तलहटी पर पहुंचा दिया गया, वहीं 20 फीसदी तोड़कर गति की भरपूर दुर्गति कर डाली गई। ऐसे में चुनिंदा स्टॉक्स तक सीमित रहना ही भला। देखें कि डिश टीवी और वीआईपी इंडस्ट्रीज में क्या हो रहा है? हमनेऔरऔर भी

मनोरंजन का काम है कि रोज की रगड़-धगड़ और खरोचों को सम कर दे, संतुलन बना दे। लेकिन हमारे सपने जब रोज यह काम बखूबी कर देते हैं तो अलग से मनोरंजन की क्या जरूरत? हां, ज्ञान जरूरी है।और भीऔर भी

ज्ञान का हर चिप खुशी के नए स्रोत खोलता है। चीजें वही रहती हैं, लेकिन नजरिया बदलने से उनके साथ आपके रिश्ते बदलकर नए बन जाते हैं। खुशी की चादर इन्हीं रिश्तों के तानेबाने से ही बुनी जाती है।और भीऔर भी

पहले स्वीकार तो करें कि आप सब कुछ नहीं जानते, तभी जाकर नया जानने की प्रक्रिया शुरू होगी। नहीं तो आप हर नए ज्ञान की हामी अपने पुराने ज्ञान से भराते रहेंगे और गाड़ी जहां की तहां ही पड़ी रहेगी।और भीऔर भी

जिस तरह कमल-दंड पानी की सतह के साथ बढ़ने के बाद छोटा नहीं हो सकता, उसी तरह ज्ञान पाने के बाद हम किसी अज्ञानी की तरह चहक नहीं सकते। शायद इसीलिए कहते हैं कि ज्ञान ही दुख का मूल कारण है।और भीऔर भी