सिद्धांत की बात करें तो किसी भी स्टॉक में निवेश करने के तीन सबसे प्रमुख आधार हैं: कंपनी की मूलभूत ताकत, अंतर्निहित मूल्य के सापेक्ष उसका भाव, कंपनी का प्रबंधन। लेकिन व्यवहार में कभी लालच तो कभी डर हमारे निवेश पर हावी हो जाता है। किसी ने कहा कि इसमें धन चार गुना हो जाएगा तो आंख मूंदकर खरीद लिया। दूसरे बेचने लगें तो हम भी बिना सोचे-समझे बेचने लगते हैं। यह गलती छोड़ें। देखें यह कंपनी…औरऔर भी

पिछले कुछ महीनों से शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग के बारे में गंभीरता से पढ़ रहा हूं तो लग रहा है कि यहां कितने चौकन्नेपन और फुर्ती की मांग है। सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। इक आग का दरिया है और डूब के जाना है। हमारी सोच, भावना और बर्ताव में ऐसी चीजें घुसी हुई हैं, जो हमारी ही दुश्मन हैं। सोच की लगाम हमारे अवचेतन के हाथ में है जिसे हम जानकर नहीं, मानकर चलते हैं। इसे जानकरऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में लालच के भाव से उतरना गलत ही नहीं, घातक है। निवेश का मकसद अपनी बचत को समय की मार से बचाना है। जो समय पर सवारी कर रहे हैं, बचत को उन्हीं की पीठ पर रखकर हम निश्चिंत हो जाते हैं। वहीं, ट्रेडिंग शुद्ध रूप से नए ज़माने का बिजनेस है। इसमें बहुत कुछ नया है। तकनीक है, तरीके हैं। इन्हें सीखना-समझना है। वरना है तो मूलतः व्यापार। अभी की हालत बड़ी चित्र-विचित्र है…औरऔर भी

लंबे दौर में अच्छे-बुरे का लॉजिक जरूर चलता होगा, लेकिन छोटे समय में शेयर बाज़ार में केवल एक लॉजिक चलता है। वो यह कि डिमांड ज्यादा है कि सप्लाई। इसी के जुड़ा है कि लालच ज्यादा है कि डर। अगर डिमांड या लालच का पलड़ा भारी है तो शेयर के भाव बढ़ेंगे। अगर डर के चलते लोग निकल रहे हैं और सप्लाई ज्यादा है तो शेयर के भाव गिरेंगे। समझदार ट्रेडर इसी नापतौल के बाद दांव चलतेऔरऔर भी

वोकहार्ट का स्टॉक/शेयर सोमवार, 8 अक्टूबर से बीएसई के मिड कैप सूचकांक से बाहर निकाल दिया जाएगा। इस खबर के आने के बाद यह थोड़ा-सा गिरकर बीएसई (कोड – 532300) में 1277.80 रुपए और एनएसई (कोड – WOCKPHARMA) में 1275.95 रुपए पर बंद हुआ है। लेकिन इससे न तो इस स्टॉक और न ही कंपनी पर कोई फर्क पड़ता है। किसे पता था कि इसी साल 6 जनवरी 2012 को पांच रुपए अंकित मूल्य का जो शेयरऔरऔर भी