प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मानें तो देश की आर्थिक विकास दर कुछ सालों में के 9 से 10 फीसदी तक पहुंच जाने का अनुमान है। वे बुधवार को नई दिल्ली में एक सरकारी समारोह में बोल रहे थे। लेकिन उनका कहना था कि अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में उत्पादकता को विस्तार देने के लिए ’खामियां’ दूर करने की कोशिश होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते कुछ सालों में देश का आर्थिक प्रदर्शन ‘प्रभावशाली’ रहा है। देशऔरऔर भी

चालू वित्त वर्ष 2010-11 में अप्रैल-जून की पहली तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 8.8 फीसदी रही है। इसमें सबसे ज्यादा योगदान मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र का रहा है जिसमें इस बार 12.4 फीसदी वृद्धि हुई है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह केवल 3.8 फीसदी बढ़ा था। सेवाओं में वित्तीय, बीमा व रीयल एस्टेट की वृद्धि दर 11 से घटकर 8 फीसदी रह गई है। हालांकि कंस्ट्रक्शन में 4.8 फीसदीऔरऔर भी

चीन अब जापान को पछाड़कर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और विश्व बैंक, गोल्डमैन सैक्स व दूसरी प्रमुख वित्तीय संस्थाओं के आकलन पर यकीन करें तो वह 2025 तक अमेरिका को नंबर-1 के पायदान से हटा देगा। इससे पहले चीन साल 2005 में ब्रिटेन व फ्रांस और 2007 में जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बना था। चीन इस समय दुनिया के समृद्ध व उभरते देशों के समूह जी-20औरऔर भी

कृषि, खाद्य व उपभोक्ता मामलों के मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने शुक्रवार को संसद में ऐसा बयान दिया जिससे लगता है कि अगर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के चहेते खाद्य सुरक्षा विधेयक को कानून बना दिया गया तो देश राजकोषीय घाटे के दलदल में घंस जाएगा। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत अगर गरीब परिवारों को महीने में 25 किलो अनाज दिया जाता है तो सरकार को 76720 करोड़औरऔर भी

रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने को प्राथमिकता मानते हुए ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला किया है। उसने मौद्रिक नीति की पहली त्रैमासिक समीक्षा में रेपो दर में 0.25 फीसदी और रिवर्स रेपो में 0.50 फीसदी की वृद्धि कर दी है। गौर करें कल शाम को लिखी गई अर्थकाम की खबर के पहले पैरा का आखिरी वाक्य, “हो सकता है कि रेपो में 0.25 फीसदी की ही वृद्धि की जाए, लेकिन रिवर्स रेपो में 0.50 फीसदीऔरऔर भी

भारत अब कृषि-प्रधान देश नहीं रहा। आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि क्षेत्र का योगदान मैन्यूफैक्चरिंग से कम है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2009-10 के जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र का योगदान 7,19,975 करोड़ रुपए (16.1%) है, जबकि कृषि, वानिकी व फिशिंग का योगदान 6,51,901 करोड़ रुपए (14.6%) है। लेकिन उद्योग के बढ़ने के बावजूद वहां रोजगार के अवसर नहीं बढ़े हैं। कृषि पर निर्भर आबादी 70औरऔर भी

देश-विदेश की 24 प्रमुख वित्तीय संस्थाओं में से कुछ का मानना है कि वित्त वर्ष 2010-11 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यस्था या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 10.2 फीसदी रह सकती है। उनके मुताबिक अप्रैल-जून 2010 की तिमाही में कृषि की विकास दर 4 फीसदी, उद्योग की विकास दर 14.3 फीसदी व सेवा क्षेत्र की विकास दर 10.8 फीसदी रहेगी और औद्योगिक मूल्य सूचकांक (आईआईपी) में 15.4 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। यह बात रिजर्वऔरऔर भी

हमारे गांव में एक गजा-धर पंडित (जीडीपी) थे। थे इसलिए कि अब नहीं हैं। गांव के उत्तर में बांस के घने झुरमुट के पीछे बना उनका कच्चा घर अब ढहकर डीह बन चुका है। तीन में से दो बेटे गांव छोड़कर मुंबई में बस गए हैं और एक कोलकाता में। वहीं पंडिताई करते हैं। शुरू में जजमान अपने ही इलाके के प्रवासी थे। लेकिन धीरे-धीरे जजमानी काफी बढ़ गई। गजाधर पंडित बाभन थे या महाबाभन, नहीं पता।औरऔर भी